कांग्रेस ने पीडीपी के साथ किसी गठबंधन या जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने की संभावनाओं को सिरे से नकार दिया है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आवास पर कश्मीर को लेकर बनी पॉलिसी-प्लानिंग ग्रुप की बैठक में राज्य में राज्यपाल शासन लगने के बाद की स्थितियों पर चर्चा और समीक्षा की गई। कांग्रेस ने ये भी साफ किया इस ग्रुप की बैठक का उद्देश्य किसी गठबंधन या सरकार पर चर्चा के लिए नहीं था। कांग्रेस राज्य में नए सिरे से विधानसभा चुनाव चाहती है।
दरअसल जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती के दिल्ली में मौजूद होने और कांग्रेस नेताओं से मुलाकात के बाद इस बात के कयास लगने लगे कि पीडीपी-कांग्रेस के साथ सरकार बनाने की संभावनाओं को तलाश रही है। जबकि कांग्रेस पहले ही पीडीपी के साथ किसी समझौते से इंकार कर चुकी है।
डा. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में अप्रैल 2017 को गठित ग्रुप की ये चौथी बैठक थी। भाजपा के समर्थन वापस लेने के बाद भी बैठक हुई थी। मंगलवार सुबह साढ़े 11 बजे शुरू हुई बैठक में करीब पौने दो घंटे चली। जिसमें कश्मीर के ताजा हालातों और राज्यपाल शासन लगने के बाद की स्थितियों की समीक्षा की गई। बैठक में तय हुआ है कि जल्द ही ग्रुप के सदस्य राज्य के लेह, लद्दाख और कारगिल इलाकों का दौरा करे वहां के लोगों के साथ चर्चा करेंगे।
बैठक के बाद ग्रुप की सदस्य और राज्य की प्रभारी महासचिव अंबिका सोनी ने ऐसी किसी भी संभावना से इंकार किया जिसमें कांग्रेस सरकार बनाने की इच्छुक है। उन्होंने पीडीपी से गठबंधन पर कहा कि ऐसे लोगों के साथ सरकार कैसे बना सकते हैं जिन्होंने राज्य के लोगों से किए गए वादों को पूरा नहीं किया है। उन्होंने कहा राज्य के लोगों को लेकर कांग्रेस क्या सोचती है और बीते तीन सालों में भाजपा-पीडीपी सरकार ने जो हालात बनाए हैं उसे लेकर नेताओं ने अपने विचार रखे। कांग्रेस का ग्रुप लगातार वहां के प्रतिनिधियों और लोगों से मिलकर उनके साथ चर्चा करता रहा है।
कांग्रेस प्रवक्ता डा. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा भाजपा-पीडीपी ने राज्य को बर्बाद कर अधर में छोड़ दिया है। पहले अनैतिक गठबंधन किया और अब हम पर थोपना चाहते हैं। भाजपा अभी भी वहां रिमोट कंट्रोल से सरकार चलाना चाहती है। जबकि कांग्रेस की मांग है कि अभी तीन साल शेष हैं ऐसे में नए सिरे से विधानसभा चुनाव कराने चाहिए।