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ऑडिट की मांग: क्या हम कभी जान पाएंगे कि पूरे देश में कोरोना से कितने लोगों की जान गई?

Sun, 13 Jun 2021 09:51 PM IST
गौरव पाण्डेय अमित शर्मा, नई दिल्ली

सार

केंद्र सरकार की जानकारी के अनुसार देश में अब तक कोरोना से 3 लाख 70 हजार 474 लोगों की मृत्यु हुई है।
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कोरोना से मौत - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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बिहार सरकार ने जैसे ही ऑडिट कराया, कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या 5458 (आठ जून तक) से 9429 तक (नौ जून को) जा पहुंची। एक ही दिन में कोरोना की कुल मौतों में 72 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि हो गई। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि यह केवल एक राज्य का मामला नहीं है, बल्कि कई राज्यों में इसी तरह कोरोना की कुल मौतों के मामले में हेरफेर किए जाने की आशंका है। 

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कांग्रेस पार्टी के मुताबिक, इसलिए पूरे देश में कोविड-19 से होने वाली मौतों की संख्या का ऑडिट कराया जाना चाहिए। इससे सच सामने आएगा और पीड़ित परिवारों की उचित सहायता की जा सकेगी। केंद्र सरकार की जानकारी के अनुसार देश में अब तक कोरोना से तीन लाख 70 हजार 474 लोगों की मृत्यु हुई है। लेकिन आशंका है कि यह संख्या इससे बहुत ज्यादा हो सकती है। 

कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा छिपाने का आरोप केवल बिहार तक ही सीमित नहीं है। राजनीतिक दल अपने शासन वाले राज्यों में इस तरह की बात भले न करें, दूसरे राजनीतिक दलों के शासन वाले राज्यों में वही दल 'डेथ ऑडिट' की मांग कर रही हैं। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने दिल्ली सरकार पर कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा छिपाने का आरोप लगाया है। 
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दिल्ली सरकार की जानकारी के अनुसार राजधानी में कोरोना संक्रमण से अब तक 24,800 मौतें हो चुकी हैं। लेकिन भाजपा नेता का आरोप है कि मौतों की कुल संख्या इससे बहुत ज्यादा है। दिल्ली प्रदेश भाजपा प्रवक्ता नेहा शालिनी दुआ ने इसके लिए नगर निगमों से जारी मृत्यु प्रमाणपत्रों का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली में सरकार की दी हुई जानकारी से कई गुना अधिक मौतें हुई हैं। 

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार को यह भी बताना चाहिए कि जिन लोगों की मौतें होम आइसोलेशन के दौरान हुई हैं, और उनका कोरोना मौतों की तरह से अंतिम संस्कार भी नहीं हो पाया है, सरकार ऐसी कोरोना मौतों की गणना कैसे करेगी, उसे इसका फार्मूला भी जनता के सामने रखना चाहिए। दुआ ने कहा कि इस मामले पर अरविंद केजरीवाल सरकार को श्वेत पत्र जारी करना चाहिए।   

वहीं, उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने अमर उजाला से कहा कि यूपी में कोरोना संक्रमण की वजह से भारी संख्या में मौतें हुई हैं। लोगों को कोरोना काल में न तो राज्य के अस्पतालों में उचित इलाज की सुविधा मिली और न ही जरूरत पड़ने पर दवाइयां और ऑक्सीजन। इस कारण राजधानी लखनऊ से लेकर दूर-दराज क्षेत्रों तक में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है। 

उन्होंने कहा कि प्रदेश में  गंगा किनारे दफनाई गई लाशें राज्य में बड़े अनिष्ट की कहानी कह रही हैं। लेकिन भाजपा सरकार की मनमर्जी और मीडिया पर दबाव के कारण सच सामने नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को कोरोना से होने वाली मौतों का ऑडिट कराकर पीड़ित परिवारों को मदद पहुंचानी चाहिए। यूपी सरकार के अनुसार उसके यहां कोरोना से केवल 21,735 मौतें हुई हैं।  

पंजाब में आप ने उठाई ऑडिट कराने की मांग

आम आदमी पार्टी दिल्ली में कोरोना मौतों पर ऑडिट की बात भले न करे, लेकिन पंजाब में उसे इसकी जरूरत समझ आती है। पंजाब विधानसभा में नेता विपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने कहा है कि पंजाब सरकार कोरोना महामारी के दौरान लोगों को उचित स्वास्थ्य सेवा देने में असफल साबित हुई जिसके कारण अनेक लोगों की कोरोना से मौत हो गई। सरकार इन पीड़ित परिवारों को अब तक कोई मदद भी नहीं दे सकी है। उन्होंने मांग की है कि पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार को एक कमेटी का गठन कर कोरोना मौतों का सच जनता के सामने रखना चाहिए जिससे सभी पीड़ित परिवारों की मदद की जा सके।
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कांग्रेस ने बताई पूरे देश में ऑडिट की जरूरत

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने रविवार को कहा कि कोरोना मौतों के मामले में अलग-अलग जगहों से शिकायतें आ रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सच बोलने का अनुरोध करने के बाद भी कई राज्य कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से होने वाली मौतों का आंकड़ा छिपा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह राजनीति का मुद्दा नहीं है, यह मानवता और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदनशीलता का मुद्दा है। अगर कोरोना की कुल मौतों का राष्ट्रीय ऑडिट होता है तो इससे हम सभी पीड़ित परिवारों तक पहुंच पाएंगे और उनके दुख दर्द को कुछ कम करने के लिए प्रयास कर पाएंगे।
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