मंगलवार को नई दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई। इस बैठक का एजेंडा एसआईआर में कथित अनियमितता रहा। कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है। कार्यसमिति की बैठक में इस विरोध प्रदर्शन को देशव्यापी बनाने की रणनीति पर चर्चा हुई।
बैठक में सीईसी और एसआईआर का मुद्दा छाया
कांग्रेस कार्यसमिति की यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विवाद चल रहा है। बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए पार्टी की आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में हो रही कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल समेत अन्य नेता शामिल हुए।
खरगे ने कहा- यह लोकतंत्र के अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा
बैठक से एक दिन पहले खरगे ने कहा था कि चुनाव आयुक्तों ने विशेष गहन पुनरीक्षण, नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने तथा मतदाता सूची के डेटाबेस पर केंद्रीकृत नियंत्रण को लेकर चिंता जताकर चुनाव आयोग के कामकाज को उजागर किया है। उन्होंने कहा था कि यह मुद्दा बेहद गंभीर है और देश में लोकतंत्र के अस्तित्व से जुड़ा है, इसलिए इसे प्राथमिकता के आधार पर उठाया जाना चाहिए।
खरगे ने कहा था, 'हम इस मुद्दे पर गंभीरता से लड़ने जा रहे हैं। यह मुद्दा पूरे देश, हमारे लोकतंत्र के अस्तित्व और देश के भविष्य से जुड़ा है। यही वजह है कि हम इस मामले को लेकर बेहद गंभीर हैं।' विपक्षी इंडी गठबंधन भी बुधवार को बैठक करेगा, जिसमें इस मुद्दे पर संयुक्त रणनीति तैयार की जाएगी। संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए एक और नोटिस दिए जाने की भी संभावना है।
देशव्यापी आंदोलन की तैयारी में विपक्ष
गोवा में कांग्रेस प्रभारी माणिकराव ठाकरे ने बैठक में आरोप लगाया कि भाजपा लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश कर रही है और इसके खिलाफ पूरा विपक्ष एकजुट है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक पार्टी से देशव्यापी आंदोलन करने का आह्वान किया।
द इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान एसआईआर से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्ति जताई थी। अखबार के अनुसार, दोनों का कहना था कि ये फैसले और आदेश उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए। हालांकि चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक बयान में कहा था कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग ने कहा कि उसके सभी आदेशों को पूर्ण कानूनी आधार प्राप्त है और वे स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त कथित तौर पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की जोड़ी के लिए मोर्चे के रूप में काम कर रहे हैं और उनका पद संविधान के लिए अपमान है।