कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीसी चाको ने कहा, 'मुझे लगता है कि नेतृत्व में कुछ चीजें दुरुस्त होनी चाहिए। लेकिन यह एक पत्र के रूप में नहीं होना चाहिए था। जिन लोगों ने इसे लिखा है, मैं उनके विचार साझा करता हूं, लेकिन सीडब्ल्यूसी की बैठक से एक दिन पहले पत्र जारी करके उन्होंने जिस तरह का व्यवहार किया, उसने विवाद पैदा कर दिया।'
विरोधियों को किनारे नहीं कर पाए राहुल
बैठक की शुरुआत में योजना राहुल गांधी के विरोधी नेताओं को किनारे करने की थी। इसी रणनीति के तहत सोनिया ने अंतरिम अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश की। इसके बाद राहुल ने पत्र लिखने वाले नेताओं पर निशाना साधा। भले पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, एके एंटनी जैसे नेताओं ने सोनिया के समर्थन में कसीदे पढ़े, मगर अंत में सोनिया को कहना पड़ा कि उनके मन में पत्र लिखने वालों के प्रति दुर्भावना नहीं है।
बड़ा सवाल-कौन संभालेगा पार्टी की कमान
विवाद टालने के लिए कमेटी बनाने की घोषणा हुई है। यह संगठन के कामकाज पर उठाए गए सवालों की पड़ताल करेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि कमेटी में किस गुट के नेता का पलड़ा भारी रहता है। हालांकि राहुल विरोधी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि कमेटी समाधान नहीं है। सवाल यह है कि पार्टी की कमान कौन संभालेगा और पार्टी भविष्य में किस तरह की कार्यशैली अपनाएगी।
प्रियंका के लिए तैयार हो सकती है जमीन
राहुल विरोधी धड़ा मानता है कि इस समय गांधी परिवार के इतर कोई पार्टी नहीं संभाल सकता। राहुल की पंसद वेणुगोपाल या किसी अन्य नेता के हाथ में कमान जाने से स्थिति और बिगड़ेगी। ऐसे में छह महीने में प्रियंका गांधी को संगठन की कमान देने की पटकथा तैयार की जा सकती है। शुरुआती दौर में नए अध्यक्ष की मदद के लिए दो वरिष्ठ नेताओं को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है।