चूंकि युवाओं का मुद्दा सभी दलों द्वारा अपने-अपने तरीके से उठाया जाता रहा है, लेकिन किसी भी पार्टी के मुख्य एजेंडे में 'बेरोजगारी' टॉप पर नहीं रही। हालांकि तीसरे-चौथे नंबर पर इसका जिक्र लगातार होता रहा है। कांग्रेस पार्टी ने अब यह महसूस किया है कि अगर 'युवा और बेरोजगारी' की समस्या लोगों को समझ आ गई तो ये बाकी सभी मुद्दों को पीछे छोड़ देंगे।
कांग्रेस नेता प्रियंका चतुर्वेदी का कहना है कि हर परिवार का फोकस अपने बच्चों की पढ़ाई लिखाई और उनके करियर पर होता है। अब पीएचडी और दूसरी डिग्री वाले युवा जब चपरासी की नौकरी लेने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं तो बेरोजगारी की हालत समझी जा सकती है। जब परिवार की भावी पीढ़ी का भविष्य ही नहीं होगा तो राष्ट्रवाद और मंदिर जैसे मुद्दे भी लोगों के मन में जगह नहीं बना सकते।
कांग्रेस पार्टी ने इन सब बातों को ध्यान में रखकर यह पता लगाया है कि आखिर चुनाव की दहलीज पर लोग नई सरकार से क्या उम्मीद रखते हैं। इसमें बेरोजगारी ही सबसे अहम मुद्दा बनकर सामने आया है।
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने साफ तौर पर कहा है कि अब हम युवाओं के मुद्दे को लेकर लोकसभा चुनाव में उतर रहे हैं। यह हमारा मुख्य चुनावी मुद्दा रहेगा। उन्होंने कहा, युवाओं को यह नहीं पता कि उनका भविष्य क्या है और वह किस ओर जा रहा है। आर्थिक विकास दर निचले स्तर पर है। फार्म इनकम ग्रोथ 14 साल के निचले स्तर पर है।
निजी निवेश सात साल के निचले स्तर पर हैं। सीएमआईई के सर्वेक्षण के अनुसार, बेरोजगारी दर 7.2 फ़ीसदी के आंकड़े को छू रही है। एनएसएसओ की रिपोर्ट के अनुसार, बेरोजगारी दर 6.1 फीसद है। युवाओं के लिए बेरोजगारी की दर 13-27 फीसदी के खतरनाक स्तर पर जा पहुंची है। यह पिछले 45 साल में सबसे अधिक है।
अखिल भारतीय निर्माता संगठन ने भी दिसंबर 2018 में कहा कि 2016 के बाद से अकेले इस सेक्टर में 35 लाख नौकरियों का नुकसान हुआ था। इसकी मुख्य वजह नोटबंदी और जीएसटी है। रणदीप ने कहा, युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़, यह मुद्दा ही एनडीए भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकेगा।