फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बंगाल उपचुनाव: हाईकोर्ट पहुंचे नंदीग्राम के कांग्रेस प्रत्याशी, पुलिस हिरासत को दी चुनौती; कब होगी सुनवाई?

Mon, 21 Sep 2026 01:42 PM IST
देवेश त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान ने अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। उनकी याचिका पर 22 सितंबर को सुनवाई प्रस्तावित है। प्रधान को 2007 में दर्ज मामलों से जुड़े लंबित गैर-जमानती वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया गया था।
विज्ञापन
नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान ने गिरफ्तारी के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने पुलिस हिरासत के खिलाफ तत्काल सुनवाई की मांग की है। मामले की सुनवाई कल यानी 22 सितंबर को होगी। मिलन प्रधान को 2007 में दर्ज मामलों से जुड़े चार लंबित गैर-जमानती वारंट के आधार पर कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 
विज्ञापन


पुलिस के मुताबिक, पूर्व मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम थाना क्षेत्र के गंगरा गांव निवासी मिलन प्रधान को 18 सितंबर को चंडीपुर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने कहा था कि यह गिरफ्तारी चुनाव और उपचुनाव के दौरान लंबे समय से लंबित गैर-जमानती वारंटों के निष्पादन के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई। पुलिस के अनुसार, यह अभियान चुनाव आयोग के स्थायी निर्देशों के तहत चलाया जा रहा है।

किन आरोपों में गिरफ्तार हुए मिलन प्रधान?
कोलकाता पुलिस ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा था, "गिरफ्तार व्यक्ति के खिलाफ लंबित मामलों में हत्या, हत्या के प्रयास, हत्या के इरादे से अपहरण, साक्ष्य गायब करना, घर में घुसना, हथियारों और घातक हथियारों के साथ दंगा जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं।" पुलिस के अनुसार, प्रधान के खिलाफ लंबित मामलों में 30 अप्रैल 2007 का नंदीग्राम थाना मामला शामिल है। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149, 448, 302 और 506 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
विज्ञापन


इसके अलावा 15 नवंबर 2007 को दर्ज नंदीग्राम थाना मामले में आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 326, 364, 302 और 201 लगाई गई थीं। पुलिस ने 8 नवंबर 2007 के नंदीग्राम थाना मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 324, 307 और 302 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत मामला दर्ज था।

पुलिस के विशेष अभियान के दौरान हुई कार्रवाई
इसके अलावा 30 जुलाई 2007 के खेजुरी थाना केस नंबर 44/07 में आईपीसी की धारा 148 और 149 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 35 के तहत मामला दर्ज किया गया था। कोलकाता पुलिस ने कहा, "गिरफ्तार व्यक्ति 2007 से 19 वर्षों तक फरार रहा और कानून की प्रक्रिया से बचता रहा। संबंधित मामलों में उसे फरार आरोपी के रूप में चार्जशीट किया गया है।"

पुलिस के अनुसार, इससे पहले भी वारंट तामील कराने की कई कोशिशें की गई थीं, लेकिन वे सफल नहीं हुईं। इसके बाद संबंधित अदालतों के समक्ष समय-समय पर नॉन-एग्जीक्यूशन रिपोर्ट दाखिल की गईं। पुलिस ने कहा, "लंबे समय से लंबित गैर-जमानती वारंटों को तामील कराना सभी चुनाव और उपचुनावों के संबंध में भारत निर्वाचन आयोग का स्थायी निर्देश है। चल रहे विशेष अभियान के दौरान प्रधान की गिरफ्तारी इसका पालन करने की दिशा में कानूनी कदम है।"

कांग्रेस ने गिरफ्तारी पर उठाए क्या सवाल?
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से पहले हुई है। वह इस सीट से कांग्रेस उम्मीदवार हैं। नंदीग्राम में उपचुनाव 6 अक्टूबर को होना है और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि 2007 के मामलों में इतने वर्षों बाद इस समय कार्रवाई क्यों की गई। पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा कि पार्टी को शुरुआत में गिरफ्तारी के कारण और प्रधान के ठिकाने की जानकारी नहीं थी।

कांग्रेस नेताओं ने इस कार्रवाई के पीछे राजनीतिक वजह होने का आरोप लगाया है। वहीं, भाजपा ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि पुलिस ने कानून के मुताबिक कार्रवाई की है। एक पुलिस अधिकारी के हवाले से आई रिपोर्टों में कहा गया कि गिरफ्तारी 2007 के हत्या मामले में लंबित वारंट से जुड़ी थी और ऐसे वारंट चुनाव होने या न होने की परवाह किए बिना तामील किए जाते हैं।

गिरफ्तारी के बाद स्थानीय अदालत ने मिलन प्रधान को 3 अक्टूबर तक 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। इसके बाद 20 सितंबर को उनके खिलाफ एक और मामला सामने आया, जिससे उनके खिलाफ मामलों की संख्या पांच हो गई। कांग्रेस ने इसके बाद कलकत्ता हाईकोर्ट में जमानत की मांग करने की बात कही थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें