मानसून के संसद सत्र में कांग्रेस वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर कुछ नरम रुख अपना सकती है। कांग्रेस का कहना है कि यह बिल यूपीए सरकार की देन है। कांग्रेस इसका विरोध नहीं कर रही है बल्कि आम जनता के हित में सही सुझाव दे रही है।
गौरतलब है कि इस बार मानसून सत्र में केंद्र सरकार हर हाल में जीएसटी बिल पास करना चाहती है। केंद्र के लिए सुकून की बात यह है कि बीते सत्र में कांग्रेस के साथ खड़े रहने वाले कई दल इस बार सरकार के साथ खड़े दिख रहे हैं।
राज्यसभा में भी केंद्र सरकार में शामिल दलों और जीएसटी से सहमति रखने वाले दलों की सदस्यों की संख्या में हाल ही में सुधार हुआ है। कांग्रेस के सदस्यों की संख्या राज्यसभा में कम हुई है। इसलिए, केंद्र सरकार एक रणनीति के तहत कांग्रेस को अलग-थलग करने का दांव चल सकती है।
माना जा रहा है कि सरकार की रणनीति और कई दलों के जीएसटी के पक्ष में नरम रुख को देखते हुए कांग्रेस ने भी टकराव के बजाए नरमी का रुख दिखाना शुरू कर दिया है। कांग्रेस अब विरोध नहीं सुझाव देने की बात कर रही है।
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला का कहना है, ‘हम जीएसटी विधेयक का विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि कांग्रेस ही जीएसटी विधेयक का विचार लेकर लाई और इसे पेश किया। हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व ने आम आदमी के हित में तीन ठोस सुझाव दिये हैं।’ सुरजेवाल का कहना है कि संप्रग सरकार के समय में मौजूदा सरकार यानी बीजेपी जीसटी का सबसे ज्यादा विरोध करने वालों में से थी।