रेलवे ओवरब्रिज के शिलान्यास कार्यक्रम में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। यह पूरा घटनाक्रम केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना की मौजूदगी में हुआ। विवाद इतना बढ़ा कि कार्यक्रम स्थल पर कुर्सियां उछलने लगीं और पुलिस को हालात संभालने के लिए बीच में आना पड़ा।
सूत्रों के मुताबिक, कार्यक्रम स्थल पर लगे बैनरों में जिला प्रभारी मंत्री शिवराज तंगड़गी और कोप्पल के सांसद राजशेखर हितनाल के नाम नहीं थे। इसी बात को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई। केंद्रीय मंत्री के पहुंचते ही इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया।
बैनर से शुरू हुआ टकराव
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप था कि जानबूझकर राज्य सरकार के मंत्री और स्थानीय सांसद के नाम हटाए गए। इसे अपमान बताते हुए उन्होंने विरोध शुरू किया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसका जवाब दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। बहस इतनी बढ़ी कि मामला हाथापाई तक पहुंच गया।
ये भी पढ़ें- अजमेर शरीफ दरगाह पर पीएम मोदी को चादर चढ़ाने से नहीं रोक सकते, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका
पुलिस ने संभाला मोर्चा
हालात तब और बिगड़े, जब मंच के पास कुर्सियां फेंकी जाने लगीं। पुलिसकर्मियों को आगे बढ़कर भीड़ को काबू में करना पड़ा। कुछ देर के लिए कार्यक्रम स्थल पूरी तरह अव्यवस्थित हो गया। पुलिस को दोनों दलों के कार्यकर्ताओं को अलग-अलग कर हालात शांत कराने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
मंत्री के बयान से और बढ़ा तनाव
सूत्रों के अनुसार, हंगामे के दौरान केंद्रीय मंत्री सोमन्ना ने कथित तौर पर कांग्रेस समर्थकों के लिए “पतालम” शब्द का इस्तेमाल किया। इस टिप्पणी के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता और ज्यादा नाराज हो गए और विरोध तेज हो गया। हालांकि, इसके बावजूद मंत्री ने शिलान्यास की औपचारिक रस्म पूरी की और कुछ देर बाद वहां से रवाना हो गए।
परियोजना की अहमियत
अधिकारियों के मुताबिक, प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज बनने से अंजनाद्री बेट्टा और हुलिगेम्मा मंदिर तक पहुंच आसान होगी। इससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और श्रद्धालुओं व स्थानीय लोगों को सुविधा मिलेगी। लेकिन शिलान्यास कार्यक्रम में हुआ सियासी हंगामा इस विकास परियोजना पर भारी पड़ता दिखा।
अन्य वीडियो-