अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि यह समझौता अबकी बार ट्रंप से हार का प्रमाण है। उन्होंने मांग की कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को अवैध ठहराए जाने के बाद इस समझौते को ठंडे बस्ते में डाला जाए और इसकी शर्तों पर फिर से बातचीत की जाए।
कांग्रेस का कहना है कि यह समझौता एकतरफा है और भारत ने इसमें ज्यादा रियायतें दी हैं। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में अबकी बार ट्रंप सरकार का नारा दिया था, लेकिन अब की डील में भारत को नुकसान हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने की संभावना पहले से थी, तो इतनी जल्दबाजी में समझौता क्यों किया गया।
कृषि क्षेत्र पर असर का दावा
रमेश ने कहा कि समझौते के तहत भारत ने अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कई कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम या खत्म करने की प्रतिबद्धता जताई है। इससे सोयाबीन, मक्का, फल, मेवा और कपास किसानों पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश के किसान प्रभावित होंगे।
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के फैसले में ट्रंप द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ को अवैध करार दिया। अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों से अधिक कदम उठाया। इसके बाद ट्रंप ने कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौते में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि भारत अब रूस से तेल खरीद कम कर रहा है और अमेरिका के साथ “न्यायसंगत” समझौता हुआ है।
रणनीतिक स्वायत्तता पर सवाल
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति और विदेश मंत्री कह रहे हैं कि भारत ने रूस से तेल खरीद कम की, जबकि भारत सरकार रणनीतिक स्वायत्तता की बात करती है। रमेश ने कहा कि सरकार इन सवालों से बच रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते में देना और लेना दोनों होता है, लेकिन यहां भारत ने केवल दिया है।
किसान महाचौपाल की घोषणा
कांग्रेस ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए देशभर में किसान महाचौपाल आयोजित करने की घोषणा की है। पहली बैठक 24 फरवरी को भोपाल में, दूसरी 7 मार्च को महाराष्ट्र में और तीसरी श्रीगंगानगर में होगी। कांग्रेस का कहना है कि 2021 में तीन कृषि कानूनों की तरह, वह किसानों के हितों से जुड़े किसी भी फैसले के खिलाफ आवाज उठाएगी। इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है।
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