विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए भाजपा प्रवक्ता गोपाल अग्रवाल ने अमर उजाला से कहा कि आज सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट कोई मुद्दा है ही नहीं। जानबूझकर विपक्ष इसे बढ़ाचढ़ा कर पेश कर रहा है। आज समय है कि सभी लोग मिलकर कोरोना के साथ लड़ाई लड़ें। सेंट्रल विस्टा का जो प्रोजेक्ट है, बहुत पहले ही मंजूर हुआ था। इसका वैक्सीन और कोरोना से कोई भी लेना देना नहीं है। आज कांग्रेस बेवजह इसे मुद्दा बना कर बेकार की बातों पर चर्चा करना चाहती है। फोटोग्राफी निषेध के सवाल पर अग्रवाल ने कहा कि जो भी कोई महत्पपूर्ण सरकारी भवन होते हैं या निर्माणाधीन होते हैं वहां फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पूर्णतया प्रतिबंधित रहती है।
गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी के बीच सेंट्रल विस्टा पुनर्निर्माण परियोजना को क्रियान्वित करने को लेकर सरकार को विपक्ष की ओर से आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच देश के कई संगठनों और पर्यावरण संगठनों ने बुधवार को केंद्र से देश में कोविड-19 महामारी के मद्देनजर अपनी महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा पुनर्निर्माण परियोजना को रोकने की अपील की है। 65 संगठनों द्वारा जारी किए गए बयान में केंद्र सरकार से 13,450 करोड़ रुपये की इस परियोजना को रोकने और सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल महामारी से निपटने में करने का आग्रह किया गया है।
ये है सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत एक नए संसद भवन और नए केंद्रीय सचिवालय के साथ राजपथ के पूरे इलाके का री-डेवलपमेंट होना है। सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत नवंबर 2022 तक नया संसद भवन बनकर तैयार होगा। दिसंबर 2022 तक उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का नया आवास भी क्रमश: नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक के पास बनकर तैयार होगा। इसके अलावा कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट भी बनाने की तैयारी की जा रही है।
इसके अलावा नेशनल म्यूजियम, नेशनल आर्काइव्ज, इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स, उद्योग भवन, बीकानेर हाउस, हैदराबाद हाउस, निर्माण भवन और जवाहर भवन भी सेंट्रल विस्टा का ही हिस्सा हैं। सेंट्रल विस्टा री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट केंद्र सरकार के इस पूरे इलाके को रेनोवेट करने की योजना को कहा जाता है। इस परियोजना के तहत 13450 करोड़ रुपये की लागत से करीब एक दर्जन भवनों के निर्माण के दौरान 46700 लोगों को अस्थाई रोजगार मिलने का अनुमान है।