सुभाष चंद्र बोस के द्वारा पहली अस्थाई सरकार बनाने की 75वीं वर्षगांठ मनाए जाने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि एक परिवार के लिए देश के नेताओं को भुलाने की कोशिश की गई। पीएम के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस ने कहा कि आरएसएस और भाजपा ने देश की आजादी के आंदोलन में कोई भूमिका नहीं निभाई थी, इसीलिए वह इस तरह के कार्यक्रम कर ऐतिहासिक नेताओं से अपने संबंध जोड़ने की कोशिश कर रही है।
आज आरएसएस ने उन सुभाष चंद्र बोस से अपना संबंध जोड़ने की कोशिश की जिन्होंने यह साफ कह दिया था कि हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग जैसी सांप्रदायिक विचार रखने वाली संस्थाओं से जुड़े लोग कांग्रेस का सदस्य नहीं हो सकते।
कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर अवसर पर राजनीति करने लगते हैं। यह प्रधानमंत्री पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। सुभाष चन्द्र बोस के इतिहास बनाने वाले क्षणों को भी आज उन्होंने राजनीति में घसीटने की कोशिश की जो हास्यास्पद है। सिंघवी ने कहा कि प्रधानमंत्री के द्वारा भारत को पूर्व, पश्चिम और उत्तर में बांटने की कोशिश करना बिल्कुल गलत है।
सिंघवी ने कहा कि आजादी के बाद लाहौरी गेट से दिए गए अपने पहले भाषण में भी पहले प्रधानमंत्री नेहरू ने यही कहा था कि अगर आज सुभाष चन्द्र बोस हमारे साथ होते तो बहुत खुशी की बात होती। इसी से साफ हो जाता है कि गांधी परिवार ने सुभाष चंद्र बोस को किस तरह का सम्मान दिया। ऐसे में यह कहा जाना कि उनका सम्मान नहीं किया गया, यह किसी व्यक्ति की छोटी सोच ही हो सकती है।