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बंगाल: ममता बनर्जी ने दी साथ देने की सलाह, कांग्रेस ने जवाब में कहा- विलय कर लें

Fri, 15 Jan 2021 06:13 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
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अधीर रंजन चौधरी - फोटो : एएनआई (फाइल)
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को कांग्रेस और वाम मोर्चा से अपील की थी कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ लड़ाई में तृणमूल कांग्रेस का साथ दें। दोनों दलों ने इसे सिरे से तो खारिज कर ही दिया है, कांग्रेस ने तृणमूल को पेशकश की है कि वह गठबंधन के स्थान पर खुद का कांग्रेस में विलय कर ले। दूसरी ओर भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस की इस सलाह को लेकर इसे पार्टी की हताशा करार दिया है। भाजपा ही तृणमूल कांग्रेस का एकमात्र विकल्प है।

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कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने शुक्रवार को कहा, 'उन्हें ऐसा लगा कि उनके लिए कांग्रेस के बिना चल पाना बहुत कठिन होगा। वे (तृणमूल कांग्रेस) कांग्रेस की सहायता से ही सत्ता में आए और उन्होंने ही कांग्रेस को समाप्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और वाम दलों जैसी सेक्युलर पार्टियों को कमजोर किया जिससे भाजपा जैसी एक सांप्रदायिक पार्टी खड़ी हो गई।' बता दें कि बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी।

राज्य कांग्रेस प्रमुख चौधरी ने प्रदेश में भाजपा के मजबूत होने के लिए सत्तारूढ़ दल को जिम्मेदार बताया। चौधरी ने कहा कि उन्हें (ममता बनर्जी) को कांग्रेस में आ जाना चाहिए क्योंकि भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस के सिवाय कोई विकल्प नहीं है। अगर वो यह महसूस कर सकते हैं तो उन्हें कांग्रेस ने नेतृत्व में आ जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ही ऐसी पार्टी है जिसने इस देश में भाजपा और उसके पूर्वजों का सामना करते हुए 100 साल से सेक्युलरिज्म को अप्रभावित रखा है। 

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'धर्मनिरपेक्ष राजनीति का एक मात्र चेहरा ममता बनर्जी ही हैं'

उन्होंने कहा कि पिछले 10 सालों से हमारे विधायकों को खरीदने के बाद तृणमूल को अब गठबंधन में दिलचस्पी क्यों है। इससे पहले तृणमूल के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने कहा था कि अगर वाम मोर्चा और कांग्रेस वास्तव में भाजपा के खिलाफ हैं तो उन्हें भगवा दल की सांप्रदायिक एवं विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ लड़ाई में ममता बनर्जी का साथ देना चाहिए। उन्होंने कहा था कि तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ही भाजपा के खिलाफ धर्मनिरपेक्ष राजनीति का असली चेहरा हैं।

दूसरी ओर माकपा के वरिष्ठ नेता सुजान चक्रवर्ती ने कहा, 'यह दिखाता है कि वह (वाम मोर्चा) अभी भी महत्वपूर्ण हैं। वाम मोर्चा और कांग्रेस विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों को हराएंगे।' उन्होंने आश्चर्य जताया कि तृणमूल कांग्रेस वाम मोर्चा और कांग्रेस को राज्य में नगण्य राजनीतिक बल करार देने के बाद उनके साथ गठबंधन के लिए बेकरार क्यों है। उन्होंने यह भी कहा कि आगामी चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी भी वाम मोर्चा को लुभाने का प्रयास कर रही है।
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'भाजपा को अकेले चुनौती देने की सामर्थ्य नहीं रखती तृणमूल'

राज्य में मजबूती से ऊभर रही भाजपा का कहना है कि तृणमूल की यह पेशकश दिखाती है कि वह पश्चिम बंगाल में अप्रैल-मई में होने वाले संभावित विधानसभा चुनावों में अपने दम पर भगवा पार्टी का मुकाबला करने का सामर्थ्य नहीं रखती है। बंगाल भाजपा के अध्यक्ष और लोकसभा सदस्य दिलीप घोष ने कहा वे (तृणमूल कांग्रेस) हमसे अकेले नहीं लड़ सकते हैं, इसलिए वे अन्य दलों से मदद मांग रहे हैं। इससे साबित होता है कि भाजपा ही तृणमूल कांग्रेस का एकमात्र विकल्प है।

लोकसभा चुनावों में बुरी तरह हारने के बाद कांग्रेस और वाम मोर्चा ने इस साल साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। माकपा नीत वाम मोर्चा को लोकसभा चुनाव में कोई सीट नहीं मिली थी जबकि कांग्रेस को उसकी कुल 42 सीटों में से बंगाल से सिर्फ दो सीटें मिली थीं। भाजपा को 18 सीटें मिली थीं जबकि तृणमूल को 22 सीटें मिली थीं। 2016 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और वाम मोर्चा गठबंधन को 294 में से 76 सीटें मिली थीं जबि तृणमूल को 211 सीटें मिली थीं।
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