कांग्रेस ने अपनी संसदीय रणनीति को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्यसभा सांसद नीरज डांगी को राज्यसभा में पार्टी का नया व्हिप नियुक्त किया है। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें यह जिम्मेदारी सदन में बेहतर समन्वय और रणनीतिक प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए सौंपी है।
नई जिम्मेदारी के तहत नीरज डांगी राज्यसभा में कांग्रेस सांसदों के बीच तालमेल बनाए रखने, सदन में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने और पार्टी की रणनीति के अनुसार मतदान कराने में अहम भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही वह राज्यसभा में पार्टी से जुड़े विभिन्न संसदीय कार्यों के संचालन और समन्वय की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।
क्यों बनाया गया राज्यसभा में कांग्रेस का व्हिप?
राजस्थान कांग्रेस में नीरज डांगी को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सबसे भरोसेमंद और करीबी सहयोगियों में गिना जाता है। लंबे समय से कांग्रेस संगठन में सक्रिय रहते हुए उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। खास तौर पर दलित और अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के अधिकारों तथा उनके सामाजिक उत्थान से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाने के कारण उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है।
पार्टी संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका और नेतृत्व क्षमता के चलते उन्हें कई बार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं। इसी भरोसे का परिणाम है कि उन्हें राज्यसभा में कांग्रेस का व्हिप भी बनाया गया है, जिससे संसद में पार्टी की रणनीति को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
राजस्थान युवा कांग्रेस में क्या भूमिका निभाई?
4 नवंबर 1970 को जयपुर में जन्मे नीरज डांगी एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता स्वर्गीय दिनेश राय डांगी राजस्थान सरकार में राज्य मंत्री रहे थे और दलित समाज के उत्थान के लिए उनके योगदान को याद किया जाता है। पिता से प्रेरणा लेकर नीरज डांगी ने छात्र जीवन से ही सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी थी। पढ़ाई में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी), कर्नाटक के सुरथकल परिसर से सिविल इंजीनियरिंग में बी.ई. की डिग्री विशिष्ट योग्यता के साथ हासिल की।
उच्च तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उन्होंने निजी क्षेत्र की बजाय राजनीति को अपना करियर चुना। वर्ष 2002 में वह राजस्थान युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष बने और 2004 से 2009 तक युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूत करने का काम किया। इस दौरान उन्होंने युवाओं को कांग्रेस से जोड़ने और संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कैसा रहा नीरज डांगी का राजनीतिक सफर?
नीरज डांगी का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। कांग्रेस ने उन्हें 2003 में देसूरी विधानसभा सीट और 2008 तथा 2018 में रेवदर (एससी) सीट से उम्मीदवार बनाया, लेकिन स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों और बेहद कम अंतर से मिली हार के कारण वह विधानसभा चुनाव नहीं जीत सके। लगातार चुनावी हार के बावजूद उन्होंने कभी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा और संगठन के लिए पूरी निष्ठा से काम करते रहे। उनकी इसी वफादारी और लंबे राजनीतिक अनुभव को देखते हुए कांग्रेस ने वर्ष 2020 में पहली बार उन्हें राज्यसभा भेजा था।