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सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को कम दाम में औद्योगिक घरानों को देगी मोदी सरकार: कांग्रेस

Wed, 20 Nov 2019 07:30 PM IST
Trainee Trainee डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
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Pawan Kheda (File Photo) - फोटो : PTI
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कांग्रेस पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने चुनावी बॉन्ड को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा, किसी भी देश के लोकतंत्र में खासतौर पर चुनावी प्रक्रिया के दौरान जो चुनावी चंदा मिलता है, वह बहुत महत्वपूर्ण पहलू होता है। इसमें दो तरह की बातें शामिल हैं।पहला, चंदा कहां से आ रहा है और दूसरा, किसी पार्टी को कितना चंदा प्राप्त हो रहा है। इन दोनों पहलुओं से ही यह स्पष्ट हो सकता है कि क्या किसी बड़े औद्योगिक घराने से पैसा लेकर सरकार ने उसके लिए कोई नीति तो नहीं बदली। औद्योगिक घराने को फायदा पहुंचाने के लिए कुछ और काम किया हो।पवन खेड़ा ने सवाल खड़ा किया कि इसी कड़ी के तहत मोदी सरकार सरकार देश के किसी पीएसयू यानी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को उन्हीं औद्योगिक घरानोंको औने-पौने दाम में देने की तैयारी तो नहीं कर रही है।

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सोमवार को एक प्रेसवार्ता में पवन खेड़ा ने कहा, 28 जनवरी 2017 की दोपहर 1.45 मिनट पर वित्त मंत्रालय ने भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर रामा सुब्रमण्यम गांधी को एक मेल भेजा था। इसमें भारतीय रिजर्व बैंक से ’चुनावी बॉन्ड’ योजना लागू करने हेतू आरबीआई एक्ट में संशोधन करने से संबंधित ड्राफ्ट था। 30, 2017 को भारतीय रिजर्व बैंक ने चुनावी बॉण्ड एवं प्रस्तावित संशोधन दोनों ही को एक ‘गलत मिसाल’ करार किया। आरबीआई ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इस योजना से या इसमें संशोधन करने से काले धन को बढ़ावा मिलेगा। लोगों को अपने काले धन को सफेद बनाने का मौका मिल जाएगा। भारतीय मुद्रा पर लोगों की आस्था कमजोर हो जाएगी।नतीजा, भारतीय बैंकिग प्रणाली के मौलिक सिद्धांत भी कमजोर होंगे
 

तत्कालीन वित्त सचिव हंसमुख अधिया ने आरबीआई के विरोध को नकारते हुए लिखा, आरबीआई शायद नहीं समझ पाया कि यह योजना चंदा देने वाले की पहचान को गुप्त रखना चाहती है और पारदर्शिता के पक्ष में है। हैरानी की बात यह है कि अधिया ने आगे लिखा, आरबीआई की यह सलाह देरी से मिली है। वित्त बिल छप चुका है, इसलिए हम इस प्रस्ताव को लागू करने जा रहे हैं। इसके 2 दिन पश्चात यानी 1 फरवरी 2017 को स्वर्गीय अरूण जेटली ने इलेक्टरल बॉन्ड योजना की घोषणा कर दी।मार्च 2017 में फाइनेंस बिल के माध्यम से यह पास हो गया। आरबीआई ने कहा, प्रस्तावित ’इलेक्टरल बॉन्ड ऐसे होंगे, जैसे एक अपारदर्शी वित्तीय साधन होता है।इसके असली स्वामित्व का कोई अता पता नहीं रहेगा। जिसके हाथ में यह बॉन्ड होगा, वही इसका स्वामी माना जाएगा।

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कांग्रेस नेता के मुताबिक, चुनाव आयोग एवं भारतीय रिजर्व बैंक दोनों ने इलेक्टरल बॉण्ड स्कीम पर गंभीर आपत्ति जताई। उसके बावजूद सरकार ने न केवल यह लागू किया, बल्कि तमाम प्रक्रिया को ताक पर रखते हुए यह संशोधन एवं इलेक्टरल बॉन्ड स्कीम को फाइनेंस बिल के तहत कानूनी दर्जा भी दे दिया।इस तरह से राज्यसभा की भूमिका को अनावश्यक बना दिया।
 

विरोधी दलों ले बदला लेने की कार्रवाई बताया 
 

पवन खेड़ा ने कहा कि ऐसा क्या कारण है कि जो योजना चुनावी चंदे को पारदर्शी बनाने के लिए लाई गई थी, उसका मकसद ही बदल दिया गया।इसमें चंदा देने वाले का नाम गुप्त रखने की बात कही गई। यह प्रावधान एक तरह से विरोधी दलों को बदला लेने की कार्यवाही से सुरक्षा प्रदान करने के लिए किया गया था।हैरानी की बात ये रही कि इन सबके बावजूद इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से अर्जित चंदे का 95 प्रतिशत भारतीय जनता पार्टी को प्राप्त हुआ।किसी व्यक्ति ने कितने बॉण्ड खरीदे और किस पार्टी को दिए, इसकी जानकारी सिर्फ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बॉण्ड खरीदने वाला एवं बॉण्ड लेने वाले और आयकर विभाग को है।स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और आयकर विभाग दोनों ही सरकार के उपक्रम हैं इसलिए चंदा देने वालों ने किसी और पार्टी को चंदा देने की हिम्मत नहीं जुटाई। 

 

इस पूरी प्रकिया में चंदा देने की 7.5 प्रतिशत की सीमा को भी हटा दिया गया। हमारी मांग है कि इलेक्टरल बॉण्ड खरीदने वालों के नाम सरकार सार्वजनिक करे।भारतीय जनता पार्टी की सरकार देश को यह बताए कि जिन लेागों ने इलेक्टोरल बॉण्ड के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी को चंदा दिया है, भारतीय जनता पार्टी की सरकारों ने (केन्द्र एवं राज्य सरकार) ने उन्हें किस तरह से उपकृत किया है। क्या उन्हें सार्वजनिक उपक्रम बेचे जा रहे हैं। क्या उनके लिए कोई नीतिगत निर्णय लिए गए हैं।कांग्रेस पार्टी, इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को तुरंत रद्द करने की मांग करती है। इस योजना का विरोध आरबीआई और चुनाव आयोग ने किया था, यह एक मर्नी लॉन्डरिंग योजना है।जिन व्यक्तियों ने आरबीआई और चुनाव आयोग के विरोध को ताक पर रखते हुए यह निर्णय लिए, उन पर एक जांच बैठाई जाए। राजीव गौड़ा ने कहा, मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि भाजपा सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए अपने भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश की है।

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