कांग्रेस पार्टी की ओर से की गई प्रेस कांफ्रेस में पूर्व रक्षा मंत्री ने चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सेना को पीछे हटाने के लिए हुए समझौते पर भी सवाल उठाए। पूर्व रक्षा मंत्री ने कहा कि गलवान घाटी कभी भी विवादित नहीं था। वर्ष 1962 में भी नहीं। ये हमेशा भारत का हिस्सा था, लेकिन पहली बार वहां हमारी सेना को शहादत देनी पड़ी है। भारत सरकार चीन के सामने झुक गई, जिसके चलते हमारी सेना को पीछे हटना पड़ा है। देश की कमजोर सरकार सेना को कमजोर बनाने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि डिसइंगेजमेंट के साथ अपने पेट्रोलिंग प्वाइंट को छोड़ना और बफ़र ज़ोन बनाने का समझौता घुटने टेकने जैसा है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार कैलाश रेंज छोड़ना भी चौंकाने वाला फैसला है। फिंगर चार से आठ तक विवादित रहा है, लेकिन भारत ने फिंगर 8 तक अपना दावा कभी नहीं छोड़ा। पूर्व रक्षा मंत्री ने कहा कि जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में बयान देकर कहा कि हमारी सेना फिंगर 3 तक रहेगी, तब भारत का एक पोस्ट फिंगर 4 पर था।