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Lok Sabha Deputy Speaker: कांग्रेस ने फिर उठाया लोकसभा उपाध्यक्ष का मुद्दा, खरगे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

Tue, 10 Jun 2025 02:15 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर चुनाव प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। खरगे ने यह मुद्दा तब उठाया है जब 21 जुलाई से संसद के मानसून सत्र की शुरुआत हो रही है। 
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मल्लिकार्जुन खरगे, पीएम मोदी - फोटो : ANI
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विस्तार
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कांग्रेस ने एक बार फिर लोकसभा उपाध्यक्ष के चुनाव का मुद्दा उठाया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर चुनाव प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस पद को रिक्त रखना भारत की लोकतांत्रिक राजनीति के लिए अच्छा संकेत नहीं है और यह संविधान के प्रावधानों का भी उल्लंघन है। खरगे ने यह मांग 21 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से पहले की है।
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कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पत्र में लिखा कि मैं लोकसभा में उपाध्यक्ष के पद की रिक्तता से संबंधित चिंताजनक मामले की ओर आपका ध्यान आकर्षित करने के लिए यह पत्र लिख रहा हूं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 93 में लोक सभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों के चुनाव का प्रावधान है। संवैधानिक रूप से उपाध्यक्ष, लोक सभा अध्यक्ष के बाद दूसरा सबसे बड़ा पीठासीन अधिकारी होता है।

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खरगे ने कहा कि उपाध्यक्ष का चुनाव लोकसभा के दूसरे या तीसरे सत्र में किया जाता है। इस चुनाव की प्रक्रिया अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया के समान ही है। अंतर केवल इतना है कि उपाध्यक्ष के चुनाव की तारीख लोकसभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमों के नियम 8(1) के अनुसार अध्यक्ष द्वारा तय की जाती है।

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में खरगे ने कहा कि पहली से सोलहवीं लोकसभा तक प्रत्येक सदन में एक उपाध्यक्ष रहा है। यह एक स्थापित परंपरा है कि उपसभापति की नियुक्ति मुख्य विपक्षी दल के सदस्यों में से ही की जाती है।

खरगे ने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार यह पद लगातार दो लोकसभा कार्यकालों के लिए रिक्त रहा है। सत्रहवीं लोकसभा के दौरान कोई उपाध्यक्ष नहीं चुना गया था और यह अठारहवीं लोकसभा में भी जारी है। यह भारत की लोकतांत्रिक राजनीति के लिए शुभ संकेत नहीं है और यह संविधान के प्रावधानों का भी उल्लंघन है।
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उन्होंने कहा कि इसलिए जरूरी है कि सदन की परंपराओं और हमारी संसद के लोकतांत्रिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए बिना किसी और देरी के लोकसभा के उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जाए।  

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