वोट बैंक की राजनीति के लिए राजनीतिक दल भले ही महिलाओं को आगे लाने की लाख बातें करें, लेकिन महिलाओं को मौका देने में वे खुद फिसड्डी साबित हो रहे हैं. यह हाल देश के दो प्रमुख दल बीजेपी ,कांग्रेस के साथ भी है, जिन्होंने 40 सदस्यीय गोवा विधानसभा के लिए कुल 4 महिलाओं को ही चुनाव मैदान में उतारा है, जबकि आम आदमी पार्टी से महिला प्रत्याशियों की संख्या 5 है। इन तीनों पार्टियों ने मात्र 9 महिला को अपना उम्मीदवार बनाया है। साल 2012 के विधानसभा चुनाव में राज्य में मात्र 10 महिला उम्मीदवार मैदान में उतरीं थी।
महिला सशक्तिकरण के दावे करने वाले तमाम राजनैतिक दलों ने इस चुनावों में महिलाओं को टिकट देने में बेहद कंजूसी बरती। जबकि गोवा में महिलाओं की आबादी 49.32 फीसदी है। इतना ही नहीं, गोवा में महिलाओं की साक्षरता दर, प्रति व्यक्ति आय देश के बाकि राज्यों से बेहतर हैं। फिर भी सियासी पार्टियां महिलाओं के प्रतिनिधित्व बढ़ाने में फीछे हैं।
राज्य में सत्ताधारी पार्टी बीजेपी की बात करें तो एक मात्र महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। कोर्टालिम से मौजूदा महिला विधायक एलिना सलदिन्हा को पार्टी ने फिर से प्रत्याशी बनाया है। 2012 में बीजेपी ने एक भी महिला उम्मीदवार को राज्य में प्रत्याशी नहीं बनाया था। एलिना, उपचुनाव में यहां से विजयी हुई थीं। इस बार पार्टी राज्य के 40 में 36 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
कांग्रेस 36 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है और तीन महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। तालेगांव से मौजूदा विधायक जेनिफर ए मोंसरेट, संगुएम से सावित्री कावेलकर और मर्रकेम से उर्मिला नाइक को प्रत्याशी बनाया है। फिछले चुनाव में कांग्रेस ने दो महिला प्रत्याशी को टिकट दिया था, जिसमें एक मोंसरेट चुनाव जीतने में कामयाब रहीं।
पहली बार चुनाव मैदान में उतरी आम आदमी पार्टी ने बीजेपी और कांग्रेस से ज्यादा महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है। पार्टी ने राज्य में पांच महिला प्रत्याशी दिए हैं। क्षेत्रिय पार्टियों की बात करें तो कोई महिला उम्मीदवार नहीं दिए हैं।