लक्षद्वीप में नियमों के बदलाव से शुरू हुआ आंदोलन अब केरल और लक्षद्वीप प्रशासन के बीच टकराव में बदल गया है। केरल विधानसभा ने सोमवार को लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल को वापस बुलाए जाने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया, तो लक्षद्वीप प्रशासन ने केरल के कोचीन व बेपोर बंदरगाहों से व्यापार बंद करने का फैसला किया। लक्षद्वीप प्रशासन ने अब अपना आवागमन और व्यापार कर्नाटक के मंगलूरू बंदरगाह से करेगा। प्रशासक के इस फैसले से व्यापारियों में नाराजगी बढ़ रही है।
केरल की 15वीं विधानसभा का पहला सरकारी प्रस्ताव पेश करते हुए सीएम पिनराई विजयन ने कहा, लक्षद्वीप का भविष्य चिंता का विषय है और इसकी अनूठी एवं स्थानीय जीवनशैली को कमजोर करना अस्वीकार्य है। उन्होंने केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप कर द्वीप के लोगों के जीवन और उनकी आजीविका की रक्षा करने की मांग की। राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करते हुए, सत्तारूढ़ माकपा के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के सदस्यों ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया।
हालांकि यूडीएफ ने इसमें कुछ संशोधनों का सुझाव दिया। वहीं दूसरी ओर, लक्षद्वीप प्रशासन ने केरल के व्यापारियों और नेताओं के लक्षद्वीप में आंदोलन करने की आशंका के मद्देनजर इस द्वीप समूह पर लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। अब सिर्फ वे लोग ही लक्षद्वीप जा पाएंगे जिनके पास स्थानीय एडीएम द्वारा जारी अनुमति पत्र होगा।
‘भगवा एजेंडे’ व कॉरपोरेट हितों को थोपने का आरोप
केरल ने प्रस्ताव में लक्षद्वीप में स्थानीय जीवन शैली एवं पारिस्थतिकी तंत्र नष्ट करके ‘भगवा एजेंडे’ और कॉरपोरेट हितों को थोपने की कोशिश करने का आरोप लगाया। इसमें कहा गया कि प्रशासक सुधार के नाम पर नारियल के पेड़ों को भगवा रंग में रंगने से शुरू हुए अपने एजेंडे के तहत द्वीपवासियों के पारंपरिक आवास, जीवन और प्राकृतिक संबंधों को धीरे-धीरे नष्ट करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
मछली पकड़ने जैसे आजीविका के पारंपरिक जरिये को नष्ट किया जा रहा है। विजयन ने कहा, केंद्रशासित प्रदेश के लोगों को ‘कॉरपोरेट हितों’ और हिंदुवादी राजनीति का गुलाम बनाने की कोशिश के खिलाफ कड़ी आवाज उठाई जानी चाहिए। विजयन ने प्रशासक को विभिन्न सरकारी विभागों के मामलों में हस्तक्षेप करने का विशेष अधिकार देने वाले केंद्र के कानून की निंदा की। उन्होंने कहा, यह अपनी पसंद के अधिकारी नियुक्त करके द्वीप के स्वाभाविक लोकतंत्र को कमजोर करने के समान है।
पटेल संस्कृति को समझना ही नहीं चाहते: फैजल
लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैजल ने कहा, प्रशासक प्रफुल्ल पटेल ने कभी द्वीप समूह के लोगों की संस्कृति को समझने की कोशिश ही नहीं की। वह बीते पांच महीनों में महज 15-20 दिनों के लिए ही लक्षद्वीप में रुके। अगर सरकार विवादित कानूनों को लेकर आगे बढ़ता है तो उन्हें अदालत का रुख करेंगे। प्रशासक को वापस बुलाए जाने की मांग करने वाले एनसीपी नेता ने कहा, भाजपा नेताओं समेत समाज का हर वर्ग इस कानून मसौदे का विरोध कर रहा है। पिछले तीन दिनों से यहां इंटरनेट नहीं चल रहा है। जहां कहीं चल भी रहा तो इतना धीमा कि व्हॉट्सएप तक नहीं चल पा रहा है। यह सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का सीधे तौर पर उल्लंघन है। पिछले साल दिसंबर में दिनेश्वर शर्मा के निधन के बाद पटेल को लक्षद्वीप का प्रशासक बनाकर भेजा गया है।
इसलिए अहम है लक्षद्वीप
लक्षद्वीप 32 छोटे-छोटे द्वीपों का समूह है जिनमें से सिर्फ 10 द्वीपों पर ही आबादी है। इनका कुल क्षेत्रफल 30 वर्ग किलोमीटर है और इनमें लगभग 60,000 लोग रहते हैं जिनमें 96 प्रतिशत मुसलमान हैं। अंडमान निकोबार की तरह ही लक्षद्वीप भी भारत की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
विरोध इसलिए
पिछले पांच महीनों में स्थानीय प्रशासक प्रफुल्ल पटेल द्वारा नियमों में बदलाव कर स्कूलों में सामिष भोजन बंद कर दिया गया, अनधिकृत कब्जे हटाने के लिए कानून बनाया गया और कानून व्यवस्था की दृष्टि से गुंडा एक्ट पारित किया गया। लेकिन स्थानीय लोग इन बदलावों को द्वीप समूह की संस्कृति में दखलंदाजी मानकर इनका विरोध कर रहे हैं।