West Bengal DA Strike: पश्चिम बंगाल में महंगाई भत्ता (DA) के बकाये को लेकर राज्य सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव बढ़ गया है। कर्मचारियों के एक वर्ग ने 13 मार्च को हड़ताल का आह्वान किया है। इस पर राज्य सरकार ने चेतावनी दी है कि जो कर्मचारी बिना कारण अनुपस्थित रहेंगे, उनका वेतन काटा जाएगा
पश्चिम बंगाल में महंगाई भत्ता (DA) के बकाये को लेकर राज्य सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव बढ़ गया है। कर्मचारियों के एक वर्ग ने 13 मार्च को हड़ताल का आह्वान किया है। इस पर राज्य सरकार ने चेतावनी दी है कि जो कर्मचारी बिना कारण अनुपस्थित रहेंगे, उनका वेतन काटा जाएगा और अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है। सरकार ने सभी कार्यालय खुले रखने के निर्देश दिए हैं।
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राज्य प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 13 मार्च को सभी सरकारी कार्यालय सामान्य रूप से खुले रहेंगे और कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। अधिकारियों ने कहा कि बिना अनुमति अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों को “डायस नॉन” के तहत चिह्नित किया जाएगा। इसका मतलब यह होगा कि उस दिन को सेवा अवधि में नहीं गिना जाएगा और उस दिन का वेतन भी नहीं मिलेगा।
कर्मचारियों ने हड़ताल क्यों बुलाई है?
कर्मचारियों के संगठन संग्रामी संयुक्त मंच ने राज्य सरकार के खिलाफ हड़ताल का आह्वान किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से डीए का बकाया भुगतान नहीं किया गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि अन्य राज्यों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन किया जाता है, लेकिन पश्चिम बंगाल में इस मामले में देरी हो रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया था?
महंगाई भत्ता विवाद पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बकाया डीए चुकाने का निर्देश दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। फरवरी में सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने कहा कि डीए कर्मचारियों का कानूनी अधिकार है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि कुल बकाये का 25 प्रतिशत दो किस्तों में चुकाया जाए। पहली किस्त 31 मार्च तक देने को कहा गया है।
बाकी बकाया भुगतान पर क्या फैसला होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने बाकी डीए भुगतान के लिए एक समिति बनाने का भी निर्देश दिया है। यह समिति सेवानिवृत्त न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में काम करेगी। समिति यह तय करेगी कि शेष बकाया राशि किस समय और किस तरीके से दी जाएगी।
सरकार ने देरी की क्या वजह बताई?
राज्य सरकार का कहना है कि करीब 3.17 लाख कर्मचारियों के रिकॉर्ड की जांच करनी है। सरकार के अनुसार 2016 से पहले के कई रिकॉर्ड हाथ से लिखे सेवा पुस्तकों में दर्ज हैं। इन्हें डिजिटल रूप में बदलने में समय लग रहा है। इसी कारण बकाया डीए के भुगतान की प्रक्रिया में देरी हो रही है।