रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि भारत एक विश्व व्यवस्था में विश्वास नहीं करता है, जहां कुछ देशों को दूसरों से श्रेष्ठ माना जाता है। उन्होंने कहा कि अगर सुरक्षा वास्तव में सामूहिक उद्यम बन जाती है तो वैश्विक ढांचे की संभावना तलाशी जा सकती है। नेशनल डिफेंस कॉलेज में एक संबोधन में उन्होंने साइबर हमलों और सूचना युद्ध जैसे गंभीर उभरते सुरक्षा खतरों का मुकाबला करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के ठोस प्रयासों का भी आह्वान किया। राजनाथ ने कहा कि सूचना युद्ध में राजनीतिक स्थिरता को खतरा पैदा करने की क्षमता है।
ऊर्जा क्षेत्र साइबर हमलों के मुख्य निशानों में से एक
उन्होंने कहा कि बिजली उत्पादन और वितरण जैसे अहम ढांचे तेजी से अधिक जटिल बन रहे हैं और ऐसी चुनौतियों से प्रभावी रूप से निपटने होगा। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र साइबर हमलों के मुख्य निशानों में से एक है लेकिन यह इकलौता नहीं है। उन्होंने कहा कि परिवहन, सार्वजनिक क्षेत्र की सेवाएं, दूरसंचार और अहम विनिर्माण उद्योग भी कमजोर हैं। राजनाथ ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को शून्य संचय का खेल नहीं माना जाना चाहिए और सभी के लिए फायदेमंद स्थिति पैदा करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमें संकीर्ण स्वार्थों के अनुसार नहीं चलना चाहिए, जो लंबे समय के लिए फायदेमंद नहीं है।
दूसरों को नुकसान पहुंचाकर मजबूत और समृद्ध भारत नहीं बनाया जाएगा
रक्षा मंत्री ने कहा कि दूसरों को नुकसान पहुंचाकर मजबूत और समृद्ध भारत नहीं बनाया जाएगा। इसके बजाय भारत दूसरे राष्ट्रों को अपनी क्षमता का अहसास कराने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि हमारी एक-दूसरे से जुड़ी वित्तीय प्रणालियां भी खतरे में हैं। आप सभी को पता होना चाहिए कि फरवरी 2016 में हैकरों ने बांग्लादेश के सेंट्रल बैंक को निशाना बनाया था और एक अरब डॉलर चुराने की कोशिश की थी। हालांकि, ज्यादातर लेनदेन रोक दिए गए लेकिन 10.1 करोड़ डॉलर अब भी गायब हैं।
राजनाथ ने कहा कि यह वित्तीय दुनिया के लिए खतरे की घंटी है कि वित्तीय प्रणाली में साइबर जोखिमों को बहुत कम आंका गया है। अगर आज यह सवाल नहीं है कि प्रमुख साइबर हमला वित्तीय स्थिरता के लिए खतरा नहीं है तो फिर कब यह सवाल बनेगा। राजनाथ ने बताया कि सूचना युद्ध कौशल में राजनीतिक स्थिरता को खतरा पहुंचाने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि इसका कोई हिसाब नहीं है कि सोशल मीडिया मंचों के जरिए समाज में फर्जी खबरें और घृणा फैलाने वाली कितनी सामग्री लाए जाने की आशंका है। सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन मंचों के संगठित इस्तेमाल का जनता की राय या अवधारणा बदलने में प्रयोग किया जा रहा है।