फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने पायलटों की ड्यूटी से जुड़े नियमों में दी गई अस्थायी छूट वापस लेने की मांग की है। संगठन ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डीजीसीए से संशोधित फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियमों को पूरी तरह लागू करने को कहा है।
एफआइपी के मुताबिक, सुरक्षा से जुड़े नियमों में बार-बार छूट दिए जाने से पायलटों की थकान को लेकर चिंता बढ़ रही है। संगठन ने डीजीसीए से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि इन रियायतों को बढ़ाने का आधार क्या है। संगठन ने 31 मार्च 2027 तक बढ़ाई गई छूट वापस लेने की मांग की है। वहीं, डीजीसीए से जुड़ी हालिया रिपोर्टों में मार्च 2027 से एफडीटीएल नियमों के दूसरे चरण को पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य बताया गया है। हालांकि, अलग-अलग रियायतों की समयसीमा अलग हो सकती है। एफडीटीएल नियमों के तहत पायलटों की अधिकतम ड्यूटी अवधि, रात में उड़ान संचालन, लगातार रात की ड्यूटी और दो उड़ानों के बीच जरूरी आराम तय किया जाता है। इन नियमों का मकसद पायलटों की थकान कम करना और उड़ान सुरक्षा बनाए रखना है।
पायलटों की कमी के दावों पर भी सवाल
एफआईपी ने एयरलाइंस की ओर से पायलटों की कमी का हवाला दिए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि छूट देने से पहले यह जांचना जरूरी है कि एयरलाइंस ने पायलटों की उपलब्धता बढ़ाने और ड्यूटी रोस्टर सुधारने के लिए क्या कदम उठाए हैं। सरकार ने मार्च 2026 में संसद में दिए जवाब में कहा था कि देश में कुल मिलाकर पायलटों की कमी नहीं है। हालांकि, कुछ विमानों के संचालन के लिए अनुभवी कमांडरों की कमी बताई गई थी। सरकार के मुताबिक, इस जरूरत को पूरा करने के लिए विदेशी पायलटों को अस्थायी अनुमति देने जैसे उपाय भी किए जा रहे हैं।
ड्यूटी और आराम के रिकॉर्ड के ऑडिट की मांग
एफआईपी ने पायलटों के ड्यूटी रोस्टर, फ्लाइट ड्यूटी रिकॉर्ड और आराम की अवधि का ऑडिट कराने की मांग की है। संगठन चाहता है कि थकान से जुड़ी रिपोर्टों की भी समीक्षा हो। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि पायलटों को तय नियमों के मुताबिक आराम मिल रहा है या नहीं। संगठन ने इस मुद्दे पर सरकार और पायलट संगठनों की संयुक्त बैठक बुलाने का भी अनुरोध किया है। FIP के मुताबिक, नियामक, एयरलाइंस और पायलट प्रतिनिधियों के बीच चर्चा जरूरी है, ताकि उड़ानों के संचालन की जरूरतों के साथ सुरक्षा मानकों का भी पालन सुनिश्चित किया जा सके।