देश के विभिन्न राज्यों में बाढ़ की स्थिति पर राज्यसभा के सांसदों ने गहरी चिंता जताई है। साथ ही एक बार फिर नदियों को जोड़ने की दिशा में तेजी से काम करने की वकालत की है। लोक महत्व के विषय पर विपक्ष के सदस्यों का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि पूर्वोत्तर में बाढ़ की स्थिति है।
देश के करीब 600 स्थानों पर राहत केंद्र बनाए गए हैं, जहां बाढ़ से प्रभावित करीब दो लाख लोगों को राहत पहुंचाई गई है। बाढ़ के चलते करीब दो लाख चालीस हजार हेक्टेयर कृषि प्रभावित हुई है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया कि सरकार बाढ़ आने के बाद धन आवंटित करती है और राहत कार्य शुरू करती है।
उन्होंने बताया कि सभी राज्यों को आपदा मद में अग्रिम राशि आवंटित की जाती है। उसके खर्च होने पर अगली किस्त जारी की जाती है। मंत्री ने बताया कि दक्षिण एश्यिाई सेटेलाइट से भविष्य में पूर्व में जानकारी भी उपलब्ध होने लगेगी। हमारी पहली कोशिश लोगों की जान की रक्षा करना है ऐसे हालात में एनडीआरएफ तत्काल प्रतिक्रिया देता है।
सपा के रामगोेपाल यादव ने कहा कि मुलायम सिंह यादव के समय यूपी और मध्य प्रदेश के बीच केन और बेतवा नदियों को जोड़ने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे। वर्षों हो गए अभी तक काम शुरू नहीं हुआ।
रिजजू ने बताया कि जब दो राज्यों के बीच एमओयू हस्ताक्षर हो चुके हैं तो हमारी जिम्मेदारी है। इस पर तत्काल काम करने का प्रयास करेंगे। भाजपा के शिव प्रताप शुक्ला ने भी बाढ़ और सूखा से निपटने के लिए नदियों को जोड़ने की योजना को जल्द शुरू करने की मांग रखी।