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'देश को चुकानी पड़ रही कीमत': US में अदाणी के खिलाफ केस बंद होने पर राहुल गांधी का PM पर हमला; क्या-क्या कहा?

Wed, 12 Aug 2026 10:17 AM IST
निर्मल कांत पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

अदाणी मामले में अमेरिकी अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि मोदी को भारत के हित बेचने के लिए मजबूर किया गया और देश को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। जानें क्या है पूरा मामला और अमेरिकी अदालत ने कौन से आरोप खारिज किए।
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राहुल गांधी, कांग्रेस नेता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। यह हमला अमेरिकी संघीय अदालत की ओर से अदाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अदाणी के खिलाफ आपराधिक आरोपों को स्थायी रूप से खारिज किए जाने के बाद किया गया।
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राहुल गांधी ने क्या आरोप लगाए?
राहुल गांधी ने कहा कि इस मामले में जितना दिख रहा है, उससे कहीं ज्यादा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक 'समझौता कर चुके प्रधानमंत्री' को भारत के हित बेचने के लिए मजबूर किया गया। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने यह भी दावा किया कि भारत को इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अमेरिकी अदालत के उस फैसले से जुड़ी एक मीडिया रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया। रिपोर्ट में बताया गया था कि अमेरिकी न्याय विभाग के गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ आरोप खारिज करने के अनुरोध को अदालत ने मंजूरी दे दी है।
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उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा, इसमें जितना दिख रहा है, उससे कहीं ज्यादा है। पोस्ट में राहुल गांधी ने लिखा, 'एक समझौता कर चुके प्रधानमंत्री को भारत के हित बेचने के लिए मजबूर किया गया। भारत इसकी बहुत बड़ी कीमत चुका रहा है।'

अमेरिकी संघीय अदालत के जज ने हाल ही में गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ आपराधिक आरोपों को स्थायी रूप से रद्द कर दिया है। इससे बंदरगाह से लेकर ऊर्जा क्षेत्र तक काम करने वाले अदाणी समूह पर करीब दो साल से बना कानूनी दबाव खत्म हो गया। न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले के जज निकोलस गाराउफिस ने अमेरिकी न्याय विभाग के आरोप रद्द करने के अनुरोध को मंजूरी दी। 

अदाणी ने अमेरिकी अदालत के इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वह इसे 'विनम्रता' और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति 'गहरे सम्मान' के साथ स्वीकार करते हैं।

अमेरिकी अदालत ने कौन से आरोप खारिज किए?
10 अगस्त को जज गाराउफिस ने 47 पन्नों का आदेश जारी किया। इसमें उन्होंने अमेरिकी न्याय विभाग के आरोप खारिज करने के अनुरोध को मंजूरी दी। यह मांग गौतम अदाणी, सागर अदाणी और अदाणी ग्रीन एनर्जी के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विनीत जैन से जुड़े मामले में की गई थी।

इनके खिलाफ तीन आरोप खारिज किए गए। इनमें प्रतिभूति धोखाधड़ी की साजिश, वायर धोखाधड़ी की साजिश और प्रतिभूति धोखाधड़ी के आरोप भी शामिल थे। इन आरोपों को स्थायी रूप से खारिज किया गया है। यानी इन्हीं आरोपों को दोबारा दर्ज नहीं किया जा सकता।

कौन से आरोप अभी बाकी हैं?
जज गाराउफिस ने मामले में दो आरोपों पर अभी फैसला नहीं दिया है। पहली धारा में विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम के उल्लंघन का आरोप है। पांचवीं धारा में न्याय में बाधा डालने की साजिश का आरोप है। ये दोनों आरोप भारत में रहने वाले पांच सह-आरोपियों से जुड़े हैं। ये आरोपी अब तक अदालत में पेश नहीं हुए हैं। इनमें रंजीत गुप्ता, सिरिल कैबनेस, सौरभ अग्रवाल, दीपक मल्होत्रा और रूपेश अग्रवाल शामिल हैं।

अमेरिकी न्याय विभाग को अदालत की शर्तें पूरी करने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया गया है। वहीं, अदालत में पेश नहीं हुए आरोपियों के वकीलों को भी इसी तारीख तक पुष्टि करनी होगी कि उनके मुवक्किल आरोप खारिज किए जाने पर सहमत हैं।

क्या अदालत ने अदाणी को आरोपों से बरी किया है?
जज ने साफ किया कि आरोप खारिज करना अभियोजन पक्ष के विवेक का इस्तेमाल करने का फैसला है। यह आरोपों पर अदालत का फैसला नहीं है। गाराउफिस ने अपने आदेश में लिखा कि किसी को भी इस फैसले को सरकार के फैसले से अदालत की सहमति या आरोपों की सच्चाई पर अदालत की राय नहीं समझना चाहिए।

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इस मामले में कोई मुकदमा नहीं चला। किसी गवाह से पूछताछ नहीं हुई। अदालत में सबूतों की जांच भी नहीं हुई। अदाणी समूह ने इन आरोपों से लगातार इनकार किया है। समूह का कहना है कि उसने लागू कानून के मुताबिक ही काम किया है।
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अमेरिकी न्याय विभाग ने आरोप क्यों हटाने को कहा?
  • मई में अमेरिकी न्याय विभाग ने विस्तृत समीक्षा के बाद आरोपों को रद्द करने का अनुरोध किया था।
  • न्याय विभाग ने इसके पीछे अधिकार क्षेत्र और सबूतों से जुड़ी चुनौतियों का हवाला दिया था।
  • विभाग ने यह भी कहा था कि जिन गतिविधियों के आरोप लगाए गए हैं, उनका ज्यादातर हिस्सा भारत से जुड़ा है। भारतीय अधिकारियों ने भी इस मामले की जांच की है। इसके अलावा, किसी निवेशक को हुए नुकसान की पहचान नहीं की गई है।
  • अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा था कि इस मामले को आगे बढ़ाना अब विभाग की प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं है।
  • विभाग ने यह भी तर्क दिया था कि बाइडन प्रशासन के अंतिम हफ्तों में सार्वजनिक किए गए इस मामले के मुकदमे तक पहुंचने की वास्तविक संभावना बहुत कम थी।
  • विभाग ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित 'नाम लेकर बदनाम करने' की कोशिश जैसा भी बताया था।
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