इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज (आईआईपीएस) के निदेशक केएस जेम्स के कार्यकाल के दौरान हुई कथित अनियमितताओं की जांच स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा की जा रही है। सूत्रों ने इस बारे में जानकारी दी है। बता दें कि केएस जेम्स के कार्यकाल में जो अनियमितताएं हुईं थीं उनमें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में डेटा की हेराफेरी, शोध पत्रों का विदेशी संस्थाओं को लीक होना और भर्ती में खामियां शामिल हैं। गौरतलब है कि जेम्स को मंत्रालय ने 27 जुलाई को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया था।
इस संबंध में 29 जुलाई को मंत्रालय ने एक नोट जारी किया था। इसमें कहा गया था कि भर्ती और नियुक्तियों में अनियमितताओं और आरक्षण रोस्टर के अनुपालन के संबंध में शिकायतें मिली हैं। इनकी जांच के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने छह मई को एक तथ्यान्वेषी समिति (एफएफसी) का गठन किया था। समिति ने दोनों शिकायतकर्ताओं के आईआईपीएस बयानों से जानकारी एकत्र की।
मंत्रालय ने कहा था कि एफएफसी को प्रथमदृष्टया मिली 35 शिकायतों में से 11 में अनियमितताएं मिलीं थीं। ये अनियमितताएं मुख्य रूप से कुछ नियुक्तियों, संकाय की भर्ती, आरक्षण रोस्टर और डेड स्टॉक रजिस्टरों में देखी गई खामियों के संबंध में थीं। इसमें कहा गया था कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और आईआईपीएस के निदेशक संस्थान के प्रमुख होने के नाते पर्याप्त पर्यवेक्षण करने में विफलता के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार हैं।
एफएफसी ने संबंधित अवधि के रजिस्ट्रारों के साथ-साथ संबंधित निदेशक के खिलाफ भी जांच की सिफारिश की थी। सूत्रों ने कहा कि इसके अलावा शोध पत्र विदेशी संस्थाओं को लीक करने, भर्ती और नई इमारतों के निर्माण में अनियमितता और आरक्षण रोस्टर और डेड स्टॉक रजिस्टर के उल्लंघन के भी आरोप हैं। इनकी भी जांच की जा रही है। जाहिर तौर पर यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने चीन स्थित एक वेबनेयर में भी भाग लिया था। इन सभी आरोपों की जांच की जा रही है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि जेम्स का निलंबन शुरुआत में 90 दिनों के लिए या आगे की जांच पूरी होने तक के लिए है। इसे मंत्रालय में निलंबन निरस्तीकरण समिति या समीक्षा समिति के अनुमोदन से रद्द किया जा सकता है। निलंबन कोई सजा नहीं है बल्कि निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच का मार्ग प्रशस्त करना है।
बता दें कि इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज (आईआईपीएस) स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत आता है। ये हर चार साल में होने वाले राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) को डिजाइन करता है। इसके लिए यह डेटा भी एकत्र और एकत्रित भी करता है।