कई बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों का शिकायत निवारण तंत्र ठीक नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर इनकी ज्यादा शिकायतें मिल रही हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के सचिव रोहित कुमार सिंह ने बृहस्पतिवार को एक कार्यक्रम में कहा कि पिछले चार वर्षों में नेशनल उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) पर शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं। एनसीएच पर इस साल नवंबर में 90,000 शिकायतें मिलीं थीं, जो एक साल पहले इसी माह में 40,000 थीं।
उन्होंने कहा कि वे ग्राहकों को इस तरह से नहीं छोड़ सकते हैं। सरकार जल्द ही सोशल मीडिया पर भ्रामक विज्ञापन और इंफ्लूएंसर्स के लिए दिशा-निर्देश लाएगी। उनके लिए यह बताना अनिवार्य हो जाएगा कि क्या उन्होंने उत्पादों का समर्थन करने के लिए पैसे लिए हैं। इसके अलावा, कॉरपोरेट को स्व-विनियमन करने के लिए कहा गया है।
ओला-उबर के खिलाफ जांच जारी
सचिव ने कहा कि सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी ओला और उबर जैसे कैब एग्रीगेटर्स के मूल्य निर्धारण से संबंधित शिकायतों की जांच कर रही है। हालांकि, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ता अदालतों में लंबित 5.27 लाख मामलों को निपटाने के लिए सरकार प्रयास कर रही है।
ई-कॉमर्स लेनदेन में शिकायतें 6 गुना बढ़ीं
उन्होंने कहा, चार साल पहले ई-कॉमर्स लेनदेन से संबंधित शिकायतों की संख्या कुल शिकायतों का 8 फीसदी थी। पिछले महीने यह 48 फीसदी हो गई। इसका मतलब है कि कई बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों की शिकायत निवारण प्रणाली ठीक से काम नहीं कर रही है। ग्राहक और कमजोर होता जा रहा है, ऐसे में इस मंत्रालय की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
बीमा क्षेत्र में 1.8 लाख लंबित मामले
कुल लंबित मामलों में से 1.8 लाख बीमा क्षेत्र से संबंधित हैं। 80,000 मामले बैंकिंग से संबंधित हैं। कुछ मामलों को संबंधित मंत्रालय के पास भेजा गया है। हाल ही में कैबिनेट ने एक विधेयक को मंजूरी दी है जो अधिनियम के तहत कुछ प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर देगा।