महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना करके कथित रुप से लोगों की भावनाएं आहत करने का आरोप लगाते हुए दिल्ली भाजपा के नेता जय भगवान गोयल के खिलाफ नागपुर के थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना छत्रपति शिवाजी से करने पर उठे विवाद से भाजपा ने किनारा कर लिया है। भाजपा ने सोमवार को कहा है कि किताब के प्रकाशन से भाजपा का कोई लेना—देना नहीं है और यह लेखक के निजी विचार हैं। भाजपा मीडिया के सह प्रभारी संजय मयूख ने कहा कि किताब के लेखक जय भगवान गोयल ने भी किताब के उन हिस्सों को हटाने की इच्छा जाहिर की है, जिसे लेकर लोगों को आपत्ति है।
किताब के लेखक व दिल्ली भाजपा नेता जय भगवान गोयल ने बताया कि किताब के जिन हिस्सों को लेकर विपक्ष ने आपत्ति जताई है, वह उन्हें संशोधित करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, 'मैं सिर्फ यही बताना चाहता था कि कैसे शिवाजी की तरह मोदी ने भी सभी को साथ लेकर काम किया और ऐसे काम करने में भी सफलता हासिल की, जिन्हें असंभव समझा जाता था। अगर इससे किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं किताब के उन हिस्सों को संशोधित करने के लिए तैयार हूं।'
शिवसेना सांसद संजय राउत ने तंज कसते हुए कहा, ‘शाबाश भाजपा’। उन्होंने कहा कि गोयल पहले भी दिल्ली में महाराष्ट्र सदन पर हमला कर चुके हैं और महाराष्ट्र तथा मराठी भाषी लोगों को गालियां दे चुके हैं। संवाददाताओं से बातचीत करते हुए भाजपा के राज्यसभा सदस्य छत्रपति संभाजी राजे ने पुस्तक पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
शिवसेना सांसद संजय राउत ने किताब के बहाने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी के वशंजों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मोदी की तुलना उनसे (शिवाजी से) किया जाना उन्हें पसंद है या नहीं। राउत ने यह भी कहा कि भाजपा को यह घोषणा करनी चाहिए कि छत्रपति शिवाजी की तुलना मोदी से करने वाली किताब से उनका कोई संबंध नहीं है। राउत ने संभाजी राजे पर निशाना साधते हुए कहा कि किताब में पीएम मोदी की तुलना छत्रपति शिवाजी से किए जाने को लेकर उनके वंशजों को भाजपा से इस्तीफा दे देना चाहिए।
इस मुद्दे पर एनसीपी और संभाजी बिग्रेड ने पुणे में लाल महल क्षेत्र के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया। एनसीपी नेता प्रशांत जगताप ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि मराठा साम्राज्य के स्वर्णिम इतिहास को मिटाने की कोशिश है। जबकि संभाजी बिग्रेड के संतोष शिंदे ने कहा कि किताब को 48 घंटों के भीतर वापस लिया जाना चाहिए, नहीं तो इसे लेकर विरोध प्रदर्शन बढ़ता जाएगा। उन्होंने कहा कि आज शिवाजी महाराज से तुलना की जा रही है। कल राजस्थान में हो सकता है कि महाराणा प्रताप से तुलना हो। महान शख्सयितों के इतिहास को मिटाना भाजपा और आरएसएस का एजेंडा है।