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बढ़ रही है भारतीय वायुसेना की ताकत, चिनूक, अपाचे और राफेल करेंगे देश की निगहबानी

रिसर्च डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनिल पांडेय Updated Wed, 18 Sep 2019 06:54 PM IST

सार

  • अमेरिका में कुल एयरक्राफ्ट 13,398
  • भारत के कुल एयरक्राफ्ट 2082
  • पाकिस्तान के कुल एयरक्राफ्ट 1342
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अमेरिका, भारत और पाकिस्तान की वायुसेना - फोटो : Amar Ujala Graphics

भारतीय वायुसेना को दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर वायुसेना माना जाता है। हाल ही में इसमें अपाचे और चिनूक जैसे मारक हेलिकॉप्टर्स को भी शामिल किया गया है। अक्तूबर से राफेल भी इसका हिस्सा बनने जा रहा है। अगले दो-तीन वर्षों में भारतीय वायुसेना में 15 चिनूक, 22 अपाचे तथा 36 राफेल लड़ाकू विमानों की ताकत शामिल हो जाएगी।



ये तीनों वायुसेना की मारक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होंगे। भारतीय वायुसेना के पास कई ऐसे बेहतरीन विमान मौजूद हैं जो जरूरत पड़ने पर दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं। इनमें मिराज-2000, जगुआर, सुखोई, मिग-29, मिग 21, तेजस, आदि शामिल है।



भविष्य में होने वाले युद्धों के नतीजे तय करने में हवाई शक्ति की श्रेष्ठता निर्णायक भूमिका निभाएगी। पिछले वर्षों में भारतीय वायुसेना सामरिक सेना से ऐसी सेना में तब्दील हुई है जिसने दुनिया भर में अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। फ्लाइट रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट, रिमोट्ली पायलेटिड एयरक्राफ्ट और युद्धक्षेत्र में असाधारण लिफ्ट क्षमताओं में कई गुणा वृद्धि करने वाली इन प्रणालियों की बदौलत इसकी सामरिक ताकत और भी बढ़ गई है।

मिग-21, मिग-27 और जगुआर वायुयान को पहले ही अपग्रेड किया जा चुका है और मिराज-2000 और मिग-29 वायुयान को अपग्रेड करने की योजना है। भारतीय वायुसेना अपने मीडियम लिफ्ट हेलिकॉप्टर जिसमें एमआई-8, एमआई-17 और एएन-32 परिवहन वायुयानों को भी अपग्रेड करने पर विचार कर रही है ताकि इनकी समग्र क्षमता को बेहतर किया जा सके।

भारत की ताकत

दुनिया की सबसे पुरानी वायुसेना ब्रिटेन की है, पर भारतीय वायुसेना शक्ति के मामले में इससे काफी आगे है। हमारा पड़ोसी पाकिस्तान की वायुसेना हमसे कई गुना पीछे है। चीन के पास 3000 से ज्यादा एयरक्राफ्ट हैं, जो इसे एशिया की सबसे बड़ी वायुसेना बनाते हैं।

दुर्गम इलाकों का बादशाह है चिनूक

इस साल की शुरुआत में भारतीय वायुसेना ने अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग द्वारा निर्मित चिनूक हेलीकॉप्टर्स को अपने बेड़े में शामिल किया है। इसका इस्तेमाल दुर्गम इलाकों में आसानी से किया जा सकता है। यह रात में भी उड़ सकता है तथा छोटे हेलीपैड पर भी उतर सकता है। अभी भारतीय वायुसेना को चार चिनूक मिले हैं। कुल 15 चिनूक खरीदे गए हैं। चिनूक हेलीकॉप्टर 11 टन तक का भार उठा सकता है।

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अमेरिका, भारत और पाकिस्तान की वायुसेना - फोटो : Amar Ujala Graphics
भारतीय वायुसेना को दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर वायुसेना माना जाता है। हाल ही में इसमें अपाचे और चिनूक जैसे मारक हेलिकॉप्टर्स को भी शामिल किया गया है। अक्तूबर से राफेल भी इसका हिस्सा बनने जा रहा है। अगले दो-तीन वर्षों में भारतीय वायुसेना में 15 चिनूक, 22 अपाचे तथा 36 राफेल लड़ाकू विमानों की ताकत शामिल हो जाएगी।



ये तीनों वायुसेना की मारक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होंगे। भारतीय वायुसेना के पास कई ऐसे बेहतरीन विमान मौजूद हैं जो जरूरत पड़ने पर दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं। इनमें मिराज-2000, जगुआर, सुखोई, मिग-29, मिग 21, तेजस, आदि शामिल है।

भविष्य में होने वाले युद्धों के नतीजे तय करने में हवाई शक्ति की श्रेष्ठता निर्णायक भूमिका निभाएगी। पिछले वर्षों में भारतीय वायुसेना सामरिक सेना से ऐसी सेना में तब्दील हुई है जिसने दुनिया भर में अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। फ्लाइट रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट, रिमोट्ली पायलेटिड एयरक्राफ्ट और युद्धक्षेत्र में असाधारण लिफ्ट क्षमताओं में कई गुणा वृद्धि करने वाली इन प्रणालियों की बदौलत इसकी सामरिक ताकत और भी बढ़ गई है।

मिग-21, मिग-27 और जगुआर वायुयान को पहले ही अपग्रेड किया जा चुका है और मिराज-2000 और मिग-29 वायुयान को अपग्रेड करने की योजना है। भारतीय वायुसेना अपने मीडियम लिफ्ट हेलिकॉप्टर जिसमें एमआई-8, एमआई-17 और एएन-32 परिवहन वायुयानों को भी अपग्रेड करने पर विचार कर रही है ताकि इनकी समग्र क्षमता को बेहतर किया जा सके।

भारत की ताकत

दुनिया की सबसे पुरानी वायुसेना ब्रिटेन की है, पर भारतीय वायुसेना शक्ति के मामले में इससे काफी आगे है। हमारा पड़ोसी पाकिस्तान की वायुसेना हमसे कई गुना पीछे है। चीन के पास 3000 से ज्यादा एयरक्राफ्ट हैं, जो इसे एशिया की सबसे बड़ी वायुसेना बनाते हैं।

दुर्गम इलाकों का बादशाह है चिनूक

इस साल की शुरुआत में भारतीय वायुसेना ने अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग द्वारा निर्मित चिनूक हेलीकॉप्टर्स को अपने बेड़े में शामिल किया है। इसका इस्तेमाल दुर्गम इलाकों में आसानी से किया जा सकता है। यह रात में भी उड़ सकता है तथा छोटे हेलीपैड पर भी उतर सकता है। अभी भारतीय वायुसेना को चार चिनूक मिले हैं। कुल 15 चिनूक खरीदे गए हैं। चिनूक हेलीकॉप्टर 11 टन तक का भार उठा सकता है।

हवाई में उड़ने वाली घातक तोप है अपाचे

भारतीय वायुसेना का अपाचे - फोटो : PTI
अपाचे को अमेरिकी कंपनी बोइंग ने भारतीय वायुसेना की जरूरत के हिसाब से विशेष तौर पर तैयार किया है। यह दुनिया का सबसे घातक लड़ाकू हेलिकॉप्टर है। यही वजह है कि अमेरिका समेत कई देश इसका इस्तेमाल करते हैं। इसकी डिजिटल कनेक्टिविटी और अत्याधुनिक सूचना प्रणाली इसे और भी ज्यादा खतरनाक बनाती है।

इस हेलिकॉप्टर में जिस तरह की तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है, वो इसे दुर्गम स्थानों पर भी कारगर मारक क्षमता और सटीक सूचनाएं उपलब्ध करती हैं। सघन पर्वतीय क्षेत्रों, पहाड़ियों और घाटियों में छिपे दुश्मन को भी यह हेलिकॉप्टर आसानी से तलाशकर सटीक निशाना साध सकता है। यह हेलिकॉप्टर 265 किमी/घंटे की रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम है।

क्या खास है 'अपाचे' में?

  • करीब 16 फुट ऊंचे और 18 फुट चौड़े अपाचे हेलिकॉप्टर को उड़ाने के लिए दो पायलट होना जरूरी है।
  • अपाचे हेलिकॉप्टर के बड़े विंग को चलाने के लिए दो इंजन होते हैं। इस वजह से इसकी रफ्तार बहुत ज्यादा है।
  • अधिकतम रफ्तार: 280 किलोमीटर प्रति घंटा।
  • अपाचे हेलिकॉप्टर का डिजाइन ऐसा है कि इसे रडार पर पकड़ना मुश्किल होता है।
  • बोइंग के अनुसार, बोइंग और अमेरिकी फौज के बीच स्पष्ट अनुबंध है कि कंपनी इसके रखरखाव के लिए हमेशा सेवाएं तो देगी पर ये मुफ्त नहीं होंगी।
  • सबसे खतरनाक हथियार: 16 एंटी टैंक मिसाइल छोड़ने की क्षमता।
  • हेलिकॉप्टर के नीचे लगी राइफल में एक बार में 30एमएम की 1,200 गोलियां भरी जा सकती हैं।
  • फ्लाइंग रेंज: करीब 550 किलोमीटर
  • ये एक बार में पौने तीन घंटे तक उड़ सकता है।
अमेरिका की डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्पोरेशन एजेंसी का कहना है कि, अपाचे AH-64E हेलिकॉप्टर भारतीय सेना की रक्षात्मक क्षमता को बढ़ाएगा। इससे भारतीय सेना को जमीन पर मौजूद खतरों से लड़ने में मदद मिलेगी। साथ ही सेना का आधुनिकीकरण भी होगा। भारत के लिए पठानकोट एयरबेस पर इन हेलिकॉप्टरों की मौजूदगी इसलिए भी अहम है क्योंकि यहां से सटी सीमा अक्सर तनावग्रस्त रही है।

राफेल यानी तूफानी रफ्तार

राफेल विमान फ्रांस की विमानन कंपनी दसॉल्ट एविएशन द्वारा बनाया गया 2 इंजन वाला लड़ाकू विमान है। इसमें हवा से जमीन में मार करने वाली स्कैल्प मिसाइलें होंगी। राफेल लड़ाकू विमानों को ओमनीरोल विमानों के रूप में रखा गया है, जो कि युद्ध के समय अहम रोल निभाने में सक्षम हैं। हवाई हमला, जमीनी समर्थन, वायु वर्चस्व, भारी हमला और परमाणु प्रतिरोध ये सारी राफेल विमान की खूबियां हैं।

यह विमान हवाई टोह, ग्राउंड सपोर्ट, इन डेप्थ स्ट्राइक, एंटी-शर्प स्ट्राइक और परमाणु अभियानों को अंजाम देने में दक्ष है। इसमें मल्टी मोड रडार लगे हैं। राफेल एक मिनट में 60 हजार फुट की ऊंचाई तक जा सकता है। अधिकतम भार उठाकर इसके उड़ने की क्षमता 24500 किलोग्राम है। विमान में फ्यूल क्षमता- 17,000 किलोग्राम है। यह 24,500 किलो उठाकर ले जाने में सक्षम है और 60 घंटे अतिरिक्त उड़ान भी भर सकता है। राफेल की अधिकतम स्पीड 2,130 किलोमीटर प्रतिघंटा और 3700 किलोमीटर तक मारक क्षमता है। राफेल को अफगानिस्तान, लीबिया, माली और इराक में इस्तेमाल किया जा चुका है।

मिराज: बालाकोट हमले का हीरो

फ्रांस में निर्मित मिराज-2000 भारत के लिए हवा में दुश्मन का खात्मा करने वाला एक और शानदार जांबाज लड़ाकू विमान है। भारतीय वायुसेना ने इसी साल जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के दस्ते पर आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर इन्हीं विमानों से आतंकी ठिकानों को नष्ट  किया था।

यही नहीं, एयरफोर्स ने इस लड़ाकू विमान के जरिए ही कारगिल में पाकिस्तानी सेना को कई अहम ठिकानों से खदेड़ा था। यह एक सीट वाला लड़ाकू विमान है जो 2,495 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। इस एयरक्राफ्ट की खासियत यह है कि इसका वजन कम है और रफ्तार ज्यादा।

जगुआर: 1350 किमी/घंटे की रफ्तार

दो इंजन वाला यह सिंगल सीटर एयरक्राफ्ट लंबी दूरी तक मार करने के लिए बेहद उपयोगी है। 1350 किलोमीटर प्रतिघंटे तक की रफ्तार से उड़ सकता है। यह 4750 किलोग्राम तक विस्फोटक और ईंधन ले जा सकता है। जगुआर की खासियत है कि वह कम ऊंचाई पर उड़ान भरकर भी दुश्मन पर हमला कर सकता है।

ये भी हैं भारतीय वायुसेना की ताकत

भारतीय वायुसेना - फोटो : Indian Air Force
  • एम्ब्रायर
  • एसयू-30 एमकेआई
  • मिग-29
  • मिग-21 बाइसन
  • मिग-27
  • सी-130जे
  • सी-17
  • आईएल-76
  • AN-32
  • एवरो
  • डोर्नियर
  • बोइंग 737-200
  • एमआई-35
  • एमआई-26
  • एमआई-17वी5
  • चेतक
  • चीता
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