उड़ान रद्द होने या यात्रियों को विमान पर सवार नहीं होने देना अब घरेलू विमानन कंपनियों को महंगा पड़ने वाला है। उड्डयन नियामक डीजीसीए के नए दिशानिर्देशों के अनुसार ऐसे मामलों में उन्हें 1 अगस्त से अब यात्रियों को भारी हर्जाना देना होगा।
संशोधित क्षतिपूर्ति नियमों के मुताबिक, किसी उड़ान के रद्द होने या उसके दो घंटे से अधिक विलंब होने की दशा में विमानन कंपनियों को दस हजार रुपये तक का हर्जाना देना होगा।
वहीं, अगर किसी यात्री को विमान में सवार होने की अनुमति नहीं दी जाती है तो ऐसी दशा में हर्जाने की राशि बीस हजार रुपये तक होगी। अभी तक विमानन कंपनियां यात्रियों को विमान पर सवार होने से इनकार करने या उड़ान रद्द होने की दशा में चार हजार रुपये तक का भुगतान करती हैं।
संशोधित क्षतिपूर्ति की राशि का निर्धारण विमानन कंपनियों समेत सभी साझेदारों के मशविरे से किया गया है।