रेलवे सुरक्षा बल अब हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार हो रहा है। जल्द ही कमांडो प्रशिक्षण संस्था बना कर आतंकवादियों से निपटने वाले जवान भी तैयार किया जाएगा। इन्हें इस तरह की ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वह नक्शल प्रभावित इलाकों में भी बेहतर सुरक्षा प्रदान कर सकें।
रेलवे यात्रियों की सुरक्षा के लिए अपने एक्ट में भी संशोधन करने की तैयारी में है। आरपीएफ के महानिदेशक अरुण कुमार ने यह भी बताया कि बटालियन के जवानों को कमांडों की तरह ट्रेनिंग दी जा रही है। ताकि फोर्स आपात स्थिति में बेहतर प्रबंधन कर सके।
यह भी बताया कि आरपीएफ में 80 हजार जवान हैं। इसमें 4500 के करीब महिला कांस्टेबल की भर्ती की गई है। इस तरह से अरपीएफ में 10 प्रतिशत महिला बल हो गई है। यह किसी भी अर्ध सैनिक बल से अधिक है। महिला कांस्टेबल भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने में सक्षम होंगी।
ट्रेनों में होने वाली चोरी, डकैती, चेन पुलिंग, अतिक्रमण, पत्थरबाजी रोकने के लिए बड़ी संख्या में जवानों को ट्रेनिंग दी जा रही है। अति संवेदनशील 180 से अधिक स्टेशनों पर प्रशिक्षित कमॉडो जवानों को तैनाती जल्द ही कर दी जाएगी। आरपीएफ के एक्ट में बदलाव करने का प्रस्ताव मंत्रालय को दिया गया है।
उम्मीद है कि पकड़े के दोषियों पर जुर्माना व सजा में वृदिध की जा सके। इसके अलावा आरपीएफ भी प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज कर अपराधियों पर शिकंजा कस सके। उन्होंने बताया कि पहले सिर्फ बड़े स्टेशन पर ही समान छूटने पर यात्रियों के सामान लौटाया जाता था।
अब उत्तर प्रदेश के छोटे शहर बस्ती व पड़रौना स्टेशन पर भी यात्रियों का सामान छूट जाता है तो उसे लौटाया जा रहा है। पिछले साल 13204 यात्रियों का 50 करोड़ रुपये का सामान लौटाया गया। घर से भागे हुए 16457 बच्चों को उनके परिजनों को सौंपा गया। महिला सुरक्षा के लिए सौ प्रतिशत महिला कोच में सीसीटीवी कैमरा से लैस किया जा रहा है।