तीनों सेनाओं के शीर्ष कमांडर साल भर में एक बार मिलते हैं और भावी योजना, तैयारी, तालमेल, सैन्य क्षमता, रणनीतिक तैयारी पर चर्चा करते हैं। इस बार यह चार दिवसीय संयुक्त सैन्य कमांडर कांफ्रेंस गुजरात के केवड़िया में हो रही है। शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वहां थे और आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तीनों सेनाओं की संयुक्त कमांडर कांफ्रेस को संबोधित करेंगे।
सैन्य मामलों के जानकार मेजर जनरल (रिटा.) अशोक मेहता कहते हैं कि लद्दाख में चीनी घुसपैठ ने हमें काफी कुछ सिखाया है। पहली बात तो यह साफ हो गई कि चीन आगे भी सीमावर्ती क्षेत्र में इस तरह की कार्रवाई कर सकता है। वह सात-आठ साल से ऐसा कर रहा है।
दूसरा, यह साफ हो गया है कि चीन मुकाबले में भारत को रखने की बजाय अमेरिका को मानकर चल रहा है, लेकिन हमारे लिए चुनौती चीन से आएगी। हमें चीन से मुकाबला करना है।
तीसरा और आखिरी सबसे महत्वपूर्ण है बजट। चीन का रक्षा बजट 200 अरब डॉलर का है। भारत का रक्षा बजट 50 अरब अमेरिकी डॉलर का है। वह तकनीक, सैन्य कैपिबिलिटी, मॉडर्न वॉरफेयर, फायर पावर में हमसे बहुत आगे है। मेजर जनरल का कहना है कि हम उनका मुकाबला नहीं कर सकते। उनसे डेपसांग, चुमार, पैंगोंग, गलवां घाटी में मिल रही चोट को इस तरह से रोक भी नहीं सकते।
इसलिए अपनी सामरिक रणनीति में एक बड़ा बदलाव करना होगा। मेजर जनरल का कहना है कि संयुक्त कमांडर कांफ्रेस में वरिष्ठ सैन्य कमांडर निश्चित रूप से इसके इर्द-गिर्द भावी रणनीति को सामरिक तैयार करेंगे। हमें सोचना होगा कि आने वाले समय में ऐसी स्थिति को कैसे रोका जा सकता है। इसके लिए सैन्य तैयारी बहुत जरूरी है। मेहता कहते हैं कि यह तैयारी बिना रक्षा क्षेत्र में बड़े निवेश के संभव भी नहीं है।