न्यायाधीशों की नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली का बचाव करते हुए सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि हर प्रणाली सही नहीं होती, लेकिन यह सबसे अच्छी प्रणाली है। उन्होंने कहा, हमें न्यायपालिका को बाहरी प्रभावों से बचाना होगा।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि न्यायपालिका को अगर स्वतंत्र होना है तो तो उसे बाहरी प्रभावों से बचाना होगा। न्यायाधीशों की नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली का बचाव करते हुए चंद्रचूड़ ने कहा कि हर प्रणाली सही नहीं होती, लेकिन यह सबसे अच्छी प्रणाली है। उन्होंने कहा, हमें न्यायपालिका को बाहरी प्रभावों से बचाना होगा।
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सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम द्वारा संवैधानिक अदालतों के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए अनुशंसित नामों को मंजूरी न देने के सरकार के कारणों का खुलासा करने पर सीजेआई ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि धारणाओं में अंतर होने गलत क्या है? लेकिन, मुझे मजूबत संवैधानिक कौशल की भावना के साथ ऐसे मतभेदों से निपटना होगा। मैं कानून मंत्री के साथ मुद्दों में शामिल नहीं होना चाहता। हम धारणाओं के मतभेद के लिए बाध्य हैं।
रिजिजू कॉलेजियम प्रणाली के खिलाफ काफी मुखर रहे हैं और एक बार उन्होंने इसे संविधान के लिए 'एलियन' भी कहा था। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि मामलों का फैसला कैसे किया जाए, इस पर सरकार की ओर से कोई दबाव नहीं है। उन्होंने कहा, न्यायाधीश के रूप में मेरे 23 साल के कार्यकाल में किसी ने मुझे यह नहीं बताया कि मामले का फैसला कैसे करना है। सरकार की ओर से कोई दबाव नहीं है। सीजेआई ने कहा कि चुनाव आयोग का फैसला इस बात का सबूत है कि न्यायपालिका पर कोई दबाव नहीं है।
सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में फैसला सुनाया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक समिति की सलाह पर की जाएगी जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) शामिल होंगे।
न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम एक आदर्श प्रणाली: न्यायमूर्ति यूयू ललित
पूर्व मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित ने कहा कि देश की शीर्ष अदालत और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम एक आदर्श प्रणाली है। उनकी यह टिप्पणी कानून मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा कॉलेजियम प्रणाली पर सवाल उठाए जाने की पृष्ठभूमि में आई है। न्यायमूर्ति ललित ने यह भी कहा कि न्यायपालिका कार्यपालिका से पूरी तरह स्वतंत्र है और उच्चतम न्यायालय शानदार है, लेकिन इसमें सुधार की जबरदस्त गुंजाइश है।
न्यायमूर्ति ललित ने इस बात पर जोर दिया कि कॉलेजियम प्रणाली एक निकाय द्वारा न्यायाधीशों के चयन को सक्षम बनाती है जो जमीनी स्तर पर प्रदर्शन की समीक्षा कर रही है और शीर्ष अदालत के निकाय द्वारा सिफारिश की प्रक्रिया परामर्श के माध्यम से होती है। उन्होंने कहा कि न्यायाधीश की सिफारिश करते समय न केवल प्रदर्शन बल्कि अन्य न्यायाधीशों की राय के साथ-साथ आईबी रिपोर्ट पर भी विचार किया जाता है और नियुक्ति की एक नई व्यवस्था केवल कानून के अनुसार ही लागू की जा सकती है।