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Coffee Board: अब देश के इन राज्यों में भी कॉफी उत्पादन की संभावना तलाश रही सरकार, अभी इन प्रदेशों का है दबदबा

सार

Coffee Board: अब देश के इन राज्यों में भी कॉफी उत्पादन की संभावना तलाश रही सरकार, अभी इन प्रदेशों का है दबदबा
 
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कॉफी उत्पादन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत की कॉफी की मांग विदेश में भी तेजी से बढ़ रही है। इसे देखते हुए कॉफी बोर्ड ने उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। भारतीय कॉफी बोर्ड कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु के अलावा पूर्वोत्तर और उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में काफी का उत्पादन तेजी बढ़ाने की संभावना तलाश रहा है।

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दरअसल, आंध्र प्रदेश और ओडिशा भी में भी कॉफी की खेती की जाती है, लेकिन ये पारंपरिक कॉफी उत्पादक क्षेत्र नहीं हैं। इसके अलावा भारत के पूर्वोत्तर राज्यों जैसे असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा, और नागालैंड में भी कॉफी की खेती की जाती है, लेकिन ये क्षेत्र अभी भी गैर-पारंपरिक कॉफी उत्पादक क्षेत्र हैं। इन सभी राज्यों में कॉफी उत्पादन बहुत ही कम क्षेत्र में होता है। बोर्ड इन सभी राज्यों के अलावा अन्य राज्यों में सभावना देख रहा है। जबकि इन राज्यों में भी कॉफी उत्पादन का क्षेत्र कैसे बढ़े ये भी शोध कर रहा है।

कॉफी बोर्ड से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि बोर्ड के लिए शोध करने वाले अधिकारी ऐसे राज्यों की तलाश कर रहे, जहां पर कॉफी का उत्पादन ज्यादा किया जा सके। दरअसल, मौजूदा दौर में भारत में सबसे ज्यादा कॉफी उत्पादन कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में होता है। इन तीनों राज्यों की हिस्सेदारी 96 फीसदी है। मौजूदा दौर में इन तीनों राज्यों में उत्पादन को बढ़ाने के लिए नई तकनीकों की मदद ली जा रही है।
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इसी तरह से पूर्वोत्तर के राज्यों में बहुत क्षेत्रफल ऐसा है, जहां पर कॉफी उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा जिन राज्यों का मौसम कॉफी उत्पादन के लिए अनुकूल है। ऐसे राज्यों में भी संभावना तलाशी जा रही है। क्योंकि मुख्य तौर पर भारत में पैदा की जाने वाली अरेबिका और  रॉबस्ट रॉयल किस्म की कॉफी की मांग वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा है। इसलिए शोधकर्ता इन्हीं दोनों किस्म की पैदावार बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। इन्हीं दो कॉफी की भारी मांग के चलते भारत का कॉफी निर्यात 2024-25 में 40 फीसदी बढ़कर 1.8 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। 2023-24 में उत्पादन 3.63 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया।

वही, सरकार देश से काफी निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार स्टार्टअप को भी प्रोत्साहन दे रही है। अभी तक 63 स्टार्टअप को निर्यात क्षेत्र से जोड़ा गया है। इसके साथ ही, सभी हितधारकों को उत्पादन, निर्यात, सेवा और नियमों के बारे में सही समय पर सटीक जानकारी उपलब्ध हो, इसके लिए इंडिया कॉफी ऐप विकसित किया गया है।
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कॉफी के लिए इसरो की ली जा रही मदद

इसके अलावा, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भारतीय कॉफी बोर्ड को कमोडिटी इकोसिस्टम के कार्बन फुटप्रिंट को मापने में मदद कर रहा है। कॉफी बोर्ड के अनुसंधान निदेशक एम सेंथिल कुमार ने कहा कि इसरो के साथ सहयोगात्मक अध्ययन शुरू किए गए हैं, जिससे भारत में छायादार कॉफी बागानों में कार्बन पृथक्करण को मापा जा सके। इसरो आंकड़े एकत्र कर रहा है,जिनका उद्देश्य यूरोपीय संघ के वनों की कटाई संबंधी प्रावधान के मद्देनजर कॉफी के कार्बन फुटप्रिंट को मापना है। नियमों के तहत कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि यूरोपीय संघ को निर्यात किए जाने वाले कॉफी उत्पाद उस क्षेत्र से होने चाहिए जहां पर 31 दिसम्बर 2020 के बाद वनों की कटाई न की गई हो।

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