सीबीआई ने कोयला घोटाले की चल रही जांच में एक नई एफआईआर दर्ज की है। यह एफआईआर मोनेट इस्पात और एनर्जी लिमिटेड के खिलाफ कंपनी को कोल ब्लॉक आवंटन और संचालन में कथित अनियमितता के मामले में दर्ज की गई है।
एजेंसी ने मंगलवार को कंपनी और अज्ञात लोगों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। कोयला घोटाले की प्रारंभिक जांच में सीबीआई ने मोनेट इस्पात और एनर्जी लिमिटेड को आवंटित किए गए गारे पलमा और राजगमर डिपसाइड ब्लॉक की जांच की थी। कंपनी ने रायपुर में अपने स्पंज आयरन प्लांट के प्रस्तावित विस्तार के मद्देनजर कोल ब्लॉक के लिए आवेदन किया था।
जांच में पाया गया था कि कंपनी को 1996 में कोल ब्लॉक आवंटित हुआ और कंपनी ने 2004 में खनन शुरू किया। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने 0.5 प्रस्तावित एमटीपीए (मीट्रिक टन पर एनम) संयंत्र की तुलना में 0.3 एमटीपीए का संयत्र ही स्थापित किया।
इस बीच कंपनी ने रायगढ़ में भी स्पंज आयरन प्लांट स्थापित किया। कंपनी ने साल 2005-06 में बिना कोयला मंत्रालय की अनुमति के अपने रायगढ़ संयंत्र के गारे पलमा कोल ब्लॉक से भी कोयला प्रयोग करना शुरू कर दिया।