मुश्किलों में घिरे कारोबारी जिग्नेश शाह ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के को-लोकेशन को ‘बड़े सफेदपोशों का अपराध’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि इसमें एक सेकंड से कम वक्त में अरबों डॉलर की गैरकानूनी कमाई की जा सकती है।
इस मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और अन्य की भूमिका की जांच होनी चाहिए। को-लोकेशन मामला एक जगह विशेष पर लगे शेयर ब्रोकरों के सर्वर पर शेयर बाजार से जुड़ी सूचनाएं कथित रूप से कुछ पहले पहुंचाने से संबंधित है।
शाह ने छह महाद्वीपों में 14 एक्सचेंज शुरू किए थे, इसमें शीर्ष जिंस एक्सचेंज एमसीएक्स भी है। इसके चलते उसे भारत का एक्सचेंज मैन कहा जाता है। फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज समूह के पूर्ववर्ती कृषि जिंस एक्सचेंज एनएसईएल में 5600 करोड़ रुपये के भुगतान की चूक के बाद उसे इन कारोबारों से हटना पड़ा था। उन्होंने अपने कारोबारी साम्राज्य के समक्ष आई परेशानियों के लिए चिदंबरम को जिम्मेदार ठहराया। शाह ने कहा, पूर्व वित्त मंत्री ने अपने चहेते एक्सचेंज के हितों के संरक्षण के लिए मुझे निशाना बनाया क्योंकि एमसीएक्स-एसएक्स की वजह से उन एक्सचेंजों का दबदबा कम हो रहा था।
लंदन नहीं भागा, एनएसईएल के दावों के निपटान का जमीनी काम पूरा
खुद को राजनीतिक और कारपोरेट साजिश का शिकार बताते हुए शाह ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है। वह भागकर लंदन नहीं गए। कोर्ट के एक के बाद एक फैसलों ने उनके पक्ष को सही ठहराया।
किसी भी जांच एजेंसी ने उनकी ओर से एक भी पैसे की अनियमितता नहीं पाई। 2013 में नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड में भुगतान चूक का मामला सामने आने के बाद उनका पूरा ध्यान सिर्फ चूक करने वाले ब्रोकरों से पैसे की वसूली पर रहा है।
पूंजी वसूली के मामले में जमीनी काम पूरा हो गया है। उन्होंने कहा कि चार-छह महीने के अंदर चूक करने वाले ब्रोकरों से 5600 करोड़ रुपये की वसूली की जा सकती है और सभी असली दावेदारों को पूरे धन का भुगतान किया जा सकता है।