असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच पांच दशक पुराने सीमा विवाद सुलझाने के लिए दोनों राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद नगालैंड ने भी असम के विवादित सीमा के साथ तेल की खोज के लिए एकसाथ आने का फैसला किया। असम और नगालैंड के मुख्यमंत्रियों हिमंत बिस्व सरमा और नेफ्यू रियो ने दोनों राज्यों के आर्थिक लाभ के लिए विवादित क्षेत्रों में तेल की खोज के लिए आगे बढ़ने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमति व्यक्त की। सरमा और रियो गुरुवार रात एक बैठक के दौरान इस समझौत पर पहुंचे।
असम सरकार के एक बयान में कहा गया है कि असम और नगालैंड दशकों पुराने सीमा विवाद को सौहार्दपूर्ण तरीके से खत्म करने के लिए सभी विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। बयान में कहा गया है कि यहां आमने-सामने की चर्चा के दौरान दोनों मुख्यमंत्रियों ने आपसी हित के मुद्दों और अंतरराज्यीय सीमा पर तेल की खोज के लिए सहयोग पर चर्चा की।
रियो ने संवाददाताओं से कहा कि असम और नगालैंड ने सैद्धांतिक रूप से विवादित क्षेत्रों में तेल की खोज के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने का फैसला किया है ताकि तेल निकाला जा सके और पड़ोसी राज्यों के बीच रॉयल्टी साझा की जा सके। उन्होंने कहा, नागालैंड के अंदर भी तेल की खोज की अपार संभावनाएं हैं, एक बार जब यह औपचारिक हो जाएगा तो हम इस पर आगे बढ़ेंगे, क्योंकि देश को बड़े पैमाने पर तेल की जरूरत है।
सरमा ने ट्वीट किया, "नई दिल्ली के असम हाउस में नगालैंड के माननीय मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो जी के साथ समय बिताने का अवसर पाकर खुशी हुई। हमारे बीच चल रहे सीमा विवाद को खत्म करने और आपसी लाभ एवं सहयोग के अन्य क्षेत्रों पर चर्चा हुई।"
नगालैंड के मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों के जातीय समूहों के समर्थन और सहयोग से सीमा विवाद के अदालत के बाहर समाधान पर असम के अपने समकक्ष के साथ सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने कहा, हमने सीमा और विकास के मुद्दों पर चर्चा की। क्योंकि हमें एक साथ काम करना है, एक दूसरे का समर्थन करना है और ऐसे ही आगे बढ़ना है।
बता दें कि असम और नगालैंड 434 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं। दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद छह दशक से अधिक पुराना है और इसे लेकर कई झड़पें भी हुई हैं। आखिरी बड़ी झड़प 1985 में मेरापानी में हुई थी, यह वर्तमान में गोलाघाट जिले में पड़ता है। इस झड़प में असम के 28 पुलिसकर्मियों सहित 41 लोग मारे गए थे। केंद्र की ओर से इस मसले को सुलझाने के कई प्रयास किए गए हैं।