सूत्रों के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी चर्चा हुई। माना जा रहा है कि यह मंत्रिमंडल विस्तार जून के दूसरे हफ्ते के बाद कभी भी हो सकता है। दोनों नेताओं के बीच हुई इस बातचीत में 2019 में होने वाले आम चुनावों को देखते हुए जातिगत समीकरण के आधार पर मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल करने पर सहमति बनी है।
आगामी चुनावों को ध्यान में रख कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जातिगत समीकरणों को देखते हुए जाट और दलितों को नए मंत्रिमंडल विस्तार में वरियता दी जा सकती है। इसके अलावा वर्तमान मंत्रिमंडल में प्रदर्शन के आधार पर मौजूदा मंत्रियों का कद बढ़ाने और घटाने पर भी चर्चा की गई।
गौरतलब है कि वर्तमान में योगी सरकार का 47 सदस्यीय मंत्रिमंडल है और इसे बढ़ाकर 60 किया जा सकता है। वहीं, योगी मंत्रिमंडल में फिलहाल पश्चिमी उत्तर प्रदेश से 7 मंत्री हैं।
सूत्रों के मुताबिक पार्टी दलितों और अति पिछड़े समुदायों के कुछ नए चेहरों को भी अहम जिम्मेदारियां सौंप सकती है। पार्टी की कोशिश है कि 2019 के चुनावों से पहले दोनों समुदायों पर मजबूत पकड़ बन जाए।
नहीं सुनते अधिकारी
पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस मुलाकात में उपचुनावों की रणनीति से इतर कुछ दूसरे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। सूत्रों का कहना है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को कई बीजेपी नेताओं, सांसदों ने शिकायत की है कि प्रदेश के अधिकारी उनकी बातों पर ध्यान नहीं देते हैं। इसके अलावा पार्टी अध्यक्ष ने योगी को मोदी सरकार की योजनाओं के तहत जल्दी से जल्दी ऐसी परियोजनाओं पर काम करने के लिए कहा है, जिससे जनता में अच्छा संदेश जाए।
इससे पहले योगी ने सोमवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज करा रहे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से भी मुलाकात की, उनकी हाल ही में दिल्ली में एम्स में मस्तिष्क में हुए घाव की सफल सर्जरी हुई है।