यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य गुरूवार से शुरू हो रहे नवरात्रि के पहले ही दिन लोकसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देंगे।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि योगी और केशव गुरूवार को लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देंगे। वैसे उनके इस्तीफे का समय शुक्रवार तक है। लेकिन योगी ने नवरात्र के पहले दिन 21 सितंबर को लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है।
चंद दिनों पहले ही योगी और केशव ने विधानपरिषद की सयदस्यता ग्रहण कर ली है। योगी अभी यूपी की गोरखपुर लोकसभा सीट तो केशव फूलपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं।
मगर दोनों के प्रदेश का दायित्व संभालने के बाद लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना कानूनी दायित्व बन गया है। कोई भी सदस्य एक समय में केवल एक ही सदन का सदस्य रह सकता है।
चाहे संसद हो या विधानसभा, इस वजह से केशव और योगी को अपनी संसदीय सीट से त्यागपत्र देना पड़ रहा है। इनके त्यागपत्र देने के बाद गोरखपुर और फूलपुर दोनों ही लोकसभा सीटों पर उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। अगले कुछ महिनों के भीतर चुनाव आयोग अपनी सुविधा के अनुसार इन दोनों ही सीटों पर उपचुनाव करवाएगा।
विधानसभा की सदस्यता के बाद क्या इस्तीफे की संवैधानिक व्यवस्था
दरअसल संसद का कोई भी सदस्य यदि किसी राज्यविधानसभा या विधानपरिषद का सदस्य बनता है तो उसे उक्त सदन की सदस्यता ग्रहण करने के 15 दिन के भीतर संसद की सदस्यता से त्यागपत्र देना होता है।
वरना जिस भी संस्था संसद या विधानसभा की उसकी सदस्यता पुरानी होगी वह स्वत: बर्खास्त हो जाएगी। संवैधानिक व्यवस्था का निर्वहन करते हुए येागी और केशव गुरूवार को लोकसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देंगे। दोनों ही नेता यूपी विधानपरिषद के सदस्य निर्वाचित हुए है।
गोरखपुर और फूलपुर की जीत को लेकर भाजपा आश्वस्त
योगी और केशव के त्यागपत्र देने से रिक्त हो रही गोरखुपर और फूलपुर दोनों ही लोकसभा की सीट पर जीत को लेकर भाजपा आश्वस्त है। सूबे के संगठन से जुडे एक वरिष्ठ नेता ने अमर उजाला को बताया कि उपचुनाव का वक्त तय करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास है। लेकिन इन दोनों ही सीटों पर चुनाव चाहे जब भी हों हर हाल में जीत भाजपा को मिलेगी।
सपा-बसपा गठबंधन के नहीं आसार
भाजपा मान रही है कि सपा-बसपा के बीच अभी राजनीतिक गठजोड़ की संभावना नहीं है। पार्टी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि सपा-बसपा के बीच गठबंधन की अभी संभावना नहीं है।
यदि गठबंधन होता भी है तो भाजपा को लाभ होगा। बसपा का कोर वोटर सीधे भाजपा के साथ जुडेगा। इस बीच सपा ने पूर्व बसपा नेता इंद्रजीत सरोज पर अपनी नजरे दौडानी शुरू कर दी है। उन्हें सपा में शामिल कर फूलपुर से सपा का उम्मीदवार बनाया जा सकता है।