कर्नाटक की राजनीति में मंगलवार को उस वक्त बड़ा टकराव देखने को मिला, जब मनरेगा को हटाने के आरोप में कांग्रेस सरकार और केंद्र आमने-सामने आ गए। बंगलूरू में राजभवन चलो आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार, कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला समेत पार्टी के विधायक और सांसद पुलिस हिरासत में ले लिए गए। कांग्रेस का कहना है कि केंद्र सरकार मनरेगा को खत्म कर वीबी-जी राम जी योजना लागू करना चाहती है, जिससे ग्रामीण गरीबों का रोजगार छिन जाएगा।
राजभवन चलो आंदोलन क्यों हुआ?
कांग्रेस की ओर से केपीसीसी के बैनर तले राज्य-स्तरीय विरोध प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बताया कि हजारों लोग इस आंदोलन में शामिल हुए। कोर्ट के आदेश के कारण रैली नहीं निकाली गई, इसलिए नेता दो बसों में सवार होकर राजभवन पहुंचे। जैसे ही नेता लोक भवन की ओर बढ़े, पुलिस ने उन्हें रोक लिया। भाषण देने के बाद नेताओं ने बस में बैठकर स्वेच्छा से गिरफ्तारी दी।
सिद्धारमैया ने केंद्र पर क्या आरोप लगाए?
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि वीबी-जी राम जी में राम का मतलब कोई धार्मिक नाम नहीं है, बल्कि यह विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) का संक्षिप्त रूप है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा रोजगार और आजीविका का कानूनी अधिकार था, जिसे मनमोहन सिंह सरकार ने लागू किया था। अब केंद्र सरकार इस अधिकार को खत्म कर रही है और संविधान से मिले अधिकार छीने जा रहे हैं।
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मनरेगा खत्म होने से क्या नुकसान होगा?
- करीब पांच करोड़ ग्रामीण लोगों को मनरेगा के तहत काम मिल रहा था।
- इसमें दिव्यांग लोग भी शामिल थे, जिनकी आजीविका इसी योजना पर निर्भर थी।
- पहले पंचायतें तय करती थीं कि गांव में कौन सा काम होगा।
- अब यह अधिकार दिल्ली से तय होने की आशंका जताई जा रही है।
- हर पंचायत को पहले करीब एक करोड़ रुपये तक मिलते थे, जो अब बंद हो सकते हैं।
पंचायतों के अधिकार पर क्यों उठा सवाल?
सिद्धारमैया ने कहा कि नई व्यवस्था से पंचायतों की भूमिका कमजोर हो जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले काम गांव की जरूरत के हिसाब से तय होता था, लेकिन अब केंद्र सरकार सब कुछ तय करना चाहती है। इसे उन्होंने ग्रामीण स्वशासन पर सीधा हमला बताया और कहा कि इससे गांवों का विकास रुक जाएगा।
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डी के शिवकुमार और सुरजेवाला ने क्या कहा?
उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने तीखा हमला करते हुए कहा कि भाजपा ने गांधी जी के नाम पर राजनीति करने का नैतिक अधिकार खो दिया है। उन्होंने कहा कि अब दिल्ली में बैठकर यह तय किया जाएगा कि कौन कहां काम करेगा। ये पंचायत व्यवस्था को कमजोर कुरने की साजिश है। शिवकुमार ने कहा कि अगर कहीं ठेकेदार काम कर रहे हैं, तो गांव के लोग खुद आगे आकर काम करें। उन्होंने केंद्र सरकार से मनरेगा को तुरंत बहाल करने की मांग की और कहा कि हर पंचायत कार्यालय के सामने गांधी जी का नाम लगाया जाएगा।
वहीं, रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा को पूरी तरह खत्म करने पर तुली है। उन्होंने मांग की कि पंचायत केंद्रों का नाम महात्मा गांधी केंद्र रखा जाए, ताकि ग्रामीणों को उनके अधिकार याद रहें।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने साफ कहा कि जब तक वीबी-जी राम जी को वापस नहीं लिया जाता और मनरेगा दोबारा लागू नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने पूरे राज्य में गांव-गांव आंदोलन और पदयात्रा का एलान किया। कांग्रेस का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ राजनीति की नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों के हक और रोजगार की लड़ाई है, जिसे सड़क से लेकर गांव तक लड़ा जाएगा।
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