असम विधानसभा में जुमे की नमाज के लिए दो घंटे के ब्रेक की परंपरा पर रोक के बाद सियासत गरम है। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि असम के सीएम सस्ती लोकप्रियता चाहते हैं और भाजपा मुसलमानों को परेशान करना चाहती है।
तेजस्वी ने लिखा, असम के मुख्यमंत्री सस्ती लोकप्रियता पाने व यूपी के सीएम योगी का चाइनीज वर्जन बनने के प्रयास में जानबूझकर मुसलमानों को परेशान करते हैं। तेजस्वी ने कहा, भाजपा के लोगों ने नफरत फैलाने, मोदी-शाह का ध्यान आकृष्ट करने व समाज में ध्रुवीकरण के लिए मुसलमान भाइयों को सॉफ्ट टारगेट बना लिया है। वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार को सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए। वहीं, जदयू नेता नीरज कुमार ने भी हिमंत के फैसले को गलत बतातेे हुए कहा कि धार्मिक मान्यताओं पर चोट पहुंचाने का किसी को भी अधिकार नहीं।
हिंदू-मुस्लिम विधायकों का सर्वसम्मति से फैसला : हिमंत
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि यह फैसला उनके अकेला का नहीं था। हिंदू और मुस्लिम विधायकों ने एक साथ बैठकर सर्वसम्मति से फैसला लिया था कि वे इस अवधि के दौरान भी काम करेंगे। सीएम सरमा कहा, हमारी विधानसभा के हिंदू और मुस्लिम मलास नियम समिति में बैठे और सर्वसम्मति से यह फैसला लिया कि दो घंटे का ब्रेक सही नहीं है। हमें इस अवधि के दौरान भी काम करना चाहिए। यह प्रथा 1937 में शुरू हुई थी और कल से बंद कर दी गई है।
‘मियां मुसलमान’ टिप्पणी पर संज्ञान लेकर कार्रवाई करें सीजेआई : महमूद मदनी
नई दिल्ली। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने शनिवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ से असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की ‘मियां मुसलमानों’ वाली टिप्पणी पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह सांविधानिक सिद्धांतों का घोर उल्लंघन है। जमीयत अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने सीजेआई, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को एक पत्र लिखा है, जिसमें असम के मुख्यमंत्री की कथित असांविधानिक टिप्पणियों की शृंखला पर प्रकाश डाला गया है और तत्काल कार्रवाई का आह्वान किया गया है।