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नीतीश का हमला, कहा- धर्मनिरपेक्षता का पाठ न पढ़ाएं हमें, सबको आइना दिखाऊंगा

Sat, 29 Jul 2017 07:29 AM IST
amarujala.com- Presented by: मोहित
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि सत्ता सेवा के लिए है, न कि मेवा के लिए। सत्ता धन संपत्ति अर्जित करने के लिए नहीं है। धर्म निरपेक्षता की चादर से भ्रष्टाचार को ढका नहीं जा सकता है। सत्ता लोकलाज से चलती है।
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सांप्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता का पाठ मुझे इस देश में कोई नेता नहीं पढ़ा सकता है। हम विचार से, मन से धर्मनिरपेक्ष हैैं और ये पाप छिपाने के लिए सेकुलर बने हैं।

बिहार विधानसभा में विश्वास मत के पक्ष में बोलते हुए नीतीश ने विपक्ष (लालू परिवार) पर तीखा हमला बोला। नीतीश ने कहा कि हम सभी आरोपों का जवाब देंगे। बिंदूवार देंगे और समयसीमा में देंगे। बाहर भी देंगे और सदन में भी देंगे। आज जुमा है और मैं चाहता हूं कि एक बजे तक कार्रवाई हो जाए।
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नीतीश ने कहा कि हम जितना चल सकते थे साथ चले, लेकिन ये लोग अहंकार में जीते हैं। गठबंधन को जीत किसके चेहरे पर मिली। ये लोग एक पार्टी के अस्तित्व को ही नकार रहे थे। जनता ने हमें बहुमत काम करने के लिए दिया है।

पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन चलाने के लिए दिया है। मेरा काम राज्य हित को देखना था, न कि एक परिवार का हित देखने के लिए मुझे जनादेश मिला था। मेरे ऊपर क्या-क्या नहीं आरोप लगाए गए, बावजूद इसके गठबंधन धर्म का पालन करने का मैंने हरसंभव प्रयास किया।

पिछले दो वर्षों में मैंने कई समस्याओं का सामना किया। अब जनता परेशान होने लगी थी, जिन लोगों ने हमें वोट दिया वे परेशान थे। लिहाजा जनहित में फैसला लेना पड़ा।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए नीतीश ने कहा कि कांग्रेस को 15 सीट से अधिक नहीं दी जा रही थी, लेकिन हमारे प्रयास से कांग्रेस को 40 सीटें मिलीं। उन्होंने खुद को धोखेबाज बताने वाले राहुल गांधी का नाम लिए बगैर कहा कि मैंने कांग्रेस नेताओं को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हस्तक्षेप करने को कहा था, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया।

इस मौके पर नीतीश ने सरकार को समर्थन देने के लिए हम, लोजपा और रालोसपा के सदस्यों को धन्यवाद दिया। लंबा भाषण देने वाले नीतीश ने संक्षिप्त में ही अपनी बात समाप्त की।
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रणछोड़ हैं नीतीश कुमार: तेजस्वी -कहा, चंपारण सत्याग्रह पर यात्रा निकालने वाले गांधी की बात कर गोडसे के साथ चले गए

नेता प्रतिपक्ष और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार रणछोड़ हो गये हैं। संघ मुक्त भारत के खिलाफ अभियान छेड़ा, लेकिन आज नतमस्तक हो गये हैं। 28 साल का नौजवान नहीं डरा, लेकिन नीतीश कुमार इस उम्र में डर गये। नीतीश जी ने कहा था कि मिट्टी में मिल जाएंगे लेकिन भाजपा में नहीं जाएंगे। हे राम से जयश्री राम के पास पहुंच गये नीतीश। अब आपकी बात पर कौन विश्वास करेगा।

बिहार विधानसभा में  विश्वास मत के दौरान नेता प्रतिपक्ष और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने जबरदस्त हमला बोला। प्रस्ताव का विरोध करते हुए तेजस्वी ने कहा कि राजगीर दौरे के दौरान नीतीश कुमार ने उन्हें एक बार फोन किया था। एक बार भी इस्तीफा नहीं मांगा। एक बार मांगते, मैं नहीं देता, तो फिर मुझे कहते।

तेजस्वी ने कहा कि तेजस्वी तो एक बहाना था, इन्हें भाजपा की गोद में जाना था। केस तो सुशील मोदी के भी खिलाफ है, तो फिर नीतीश कुमार ने उनके साथ शपथ क्यों ली।

तेजस्वी ने कहा कि लालू प्रसाद पर पहले से ही केस चल रहा था तब क्यों अपना अस्तित्व बचाने के लिए राजद के साथ गठबंधन किया। उन्होंने कहा कि चार साल में चार सरकार बनी इसका जवाब देना चाहिए।

जनता ने महा गठबंधन को पांच साल के लिए चुना था, लेकिन बीच में सरकार बदल गयी। लोग कहते हैं लालू ने पुत्रमोह में ऐसा किया। पुत्र मोह होता तो मैं मुख्यमंत्री बनता। दरअसल लालू जी ने भाई मोह में पड़कर इनसे समझौता किया और नीतीश कुमार को जीवित करने का काम किया।

नीतीश कुमार विकास पुरूष हैं तो उनका जनाधार क्या है। 2014 में चुनाव लड़े तो 2 सीटों पर क्यों सिमट गये। जब जब अकेले लड़े 1-2 सीट ही जीत पाये। नीतीश को कभी भाजपा तो कभी हमलोगों की मदद लेनी पड़ती है। यह कौन सा सिद्धांत है।

तेजस्वी ने कहा कि नीतीश जी को मैंने गुरु माना था। चाचा थे है और रहेंगे, लेकिन इनकी राजनीति से उदास हूं। उन्होंने कहा कि महागठबंधन को बिहार की जनता ने चुना था, लेकिन जनता के मत का अपमान किया गया।

मोदी ने बिहार की बोली लगायी थी, अब जिस प्रकार नीतीश जी अचानक उनके साथ गये हैं हो सकता है कि भाजपा ने मुख्यमंत्री और जदयू की बोली लगा दी हो।
तेजस्वी ने कहा कि हमलोग स्वाभिमानी लोग हैं, इसलिए नीतीश कुमार हमलोगों को बर्खास्त नहीं कर सके।

नीतीश कुमार ने आपको (सुशील मोदी की ओर इशारे करते हुए) निकाला था और आप को आज उनके बगल में बैठने में शर्म नहीं आ रही है, अपमान नहीं महसूस हो रहा है। मेरे परिवार को राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है।

मुख्यमंत्री जानते हैं कि मैंने किस प्रकार ईमानदारी के काम किया है। मैंने तो यहां तक कहा था कि कोई भी टेंडर की फाइल मंत्री के पास नहीं आएगी, लेकिन किसने विरोध किया ये नीतीश जी बताएंगे।
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