मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि सत्ता सेवा के लिए है, न कि मेवा के लिए। सत्ता धन संपत्ति अर्जित करने के लिए नहीं है। धर्म निरपेक्षता की चादर से भ्रष्टाचार को ढका नहीं जा सकता है। सत्ता लोकलाज से चलती है।
सांप्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता का पाठ मुझे इस देश में कोई नेता नहीं पढ़ा सकता है। हम विचार से, मन से धर्मनिरपेक्ष हैैं और ये पाप छिपाने के लिए सेकुलर बने हैं।
बिहार विधानसभा में विश्वास मत के पक्ष में बोलते हुए नीतीश ने विपक्ष (लालू परिवार) पर तीखा हमला बोला। नीतीश ने कहा कि हम सभी आरोपों का जवाब देंगे। बिंदूवार देंगे और समयसीमा में देंगे। बाहर भी देंगे और सदन में भी देंगे। आज जुमा है और मैं चाहता हूं कि एक बजे तक कार्रवाई हो जाए।
नीतीश ने कहा कि हम जितना चल सकते थे साथ चले, लेकिन ये लोग अहंकार में जीते हैं। गठबंधन को जीत किसके चेहरे पर मिली। ये लोग एक पार्टी के अस्तित्व को ही नकार रहे थे। जनता ने हमें बहुमत काम करने के लिए दिया है।
पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन चलाने के लिए दिया है। मेरा काम राज्य हित को देखना था, न कि एक परिवार का हित देखने के लिए मुझे जनादेश मिला था। मेरे ऊपर क्या-क्या नहीं आरोप लगाए गए, बावजूद इसके गठबंधन धर्म का पालन करने का मैंने हरसंभव प्रयास किया।
पिछले दो वर्षों में मैंने कई समस्याओं का सामना किया। अब जनता परेशान होने लगी थी, जिन लोगों ने हमें वोट दिया वे परेशान थे। लिहाजा जनहित में फैसला लेना पड़ा।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए नीतीश ने कहा कि कांग्रेस को 15 सीट से अधिक नहीं दी जा रही थी, लेकिन हमारे प्रयास से कांग्रेस को 40 सीटें मिलीं। उन्होंने खुद को धोखेबाज बताने वाले राहुल गांधी का नाम लिए बगैर कहा कि मैंने कांग्रेस नेताओं को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हस्तक्षेप करने को कहा था, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया।
इस मौके पर नीतीश ने सरकार को समर्थन देने के लिए हम, लोजपा और रालोसपा के सदस्यों को धन्यवाद दिया। लंबा भाषण देने वाले नीतीश ने संक्षिप्त में ही अपनी बात समाप्त की।