असम के सिलचर में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के काफिले के गुजरने के दौरान एंबुलेंस के रुकने का वीडियो सामने आया। घटना के बाद सरमा ने माफी मांगते हुए इसे अस्वीकार्य बताया और जांच के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि काफिले का रास्ता किसी की जिंदगी से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है। आखिर एंबुलेंस क्यों रुकी? मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करने को कहा और पहले से क्या निर्देश जारी थे? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
असम सरकार ने हाल ही में वीआईपी संस्कृति खत्म करने का एक बड़ा संदेश देते हुए मुख्यमंत्री के काफिले में शामिल वाहनों की संख्या घटा दी। असम मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने इसके साथ ही जिला आयुक्तों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को सख्त निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के काफिले की वजह से एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों को न रोका जाए। इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम जनता को कोई असुविधा न हो। देश के कई अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री भी पूर्व में वीआईपी संस्कृति खत्म करने और जनता की सुविधा के लिए ऐसे कड़े फैसले ले चुके हैं।
हिमंत बिस्व सरमा ने घटना के बाद क्या कहा?
हिमंत बिस्व सरमा ने साफ कहा कि किसी मुख्यमंत्री के काफिले का रास्ता किसी ऐसे व्यक्ति की जिंदगी से ऊपर नहीं हो सकता, जिसे तत्काल इलाज की जरूरत हो। उन्होंने घटना को अस्वीकार्य बताया और मरीज तथा उसके परिवार से माफी मांगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आम नागरिकों को उनके काफिले की वजह से परेशानी न हो, इसके लिए पहले से निर्देश जारी किए गए हैं। अब उन्होंने अधिकारियों को यह पता लगाने के लिए जांच का आदेश दिया है कि उनके निर्देशों का पालन क्यों नहीं हुआ। साथ ही नियम तोड़ने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
मुख्यमंत्री के काफिले को लेकर पहले क्या निर्देश दिए?
सरमा ने कहा कि उनके काफिले की आवाजाही के दौरान आम लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए पहले भी स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद सिलचर की घटना ने इन निर्देशों को जमीन पर लागू करने के तरीके पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री 30 सितंबर को एक दिन के कार्यक्रम के लिए सिलचर पहुंचे थे, जिसमें चुनाव से जुड़ी एक सार्वजनिक सभा भी शामिल थी। उनके काफिले की आवाजाही के दौरान यातायात को नियंत्रित किया गया। घटना के बाद अब यह सवाल भी सामने आया है कि सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को रास्ता देने के लिए स्थानीय स्तर पर क्या व्यवस्था अपनाई जा रही है।