सार
सीएम फडणवीस ने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की ओर से आयोजित संयुक्त रैली को शोकसभा जैसा बताया। उन्होंने कहा कि रैली में जीत की नहीं, सत्ता छिनने की पीड़ा झलकी। फडणवीस ने गर्व से कहा कि वे मराठी और हिंदू हैं और सभी मराठी और गैर-मराठी उनके साथ हैं। साथ ही इस दौरान उन्होंने राज ठाकरे पर भी धन्यवाद बोलते हुए कटाक्ष किया।
सीएम देवेंद्र फडणवीस और राज ठाकरे, उद्धव ठाकरे
- फोटो : ANI/PTI
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को शिवसेना (उद्धव गुट) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि उद्धव ने जो भाषण संयुक्त रैली में दिया, वह रूदाली जैसा था। रुदाली वे महिलाएं होती हैं जो शोक प्रकट करने के लिए शोक सभाओं में नियुक्त की जाती हैं। फडणवीस ने कहा कि यह रैली जीत का जश्न नहीं बल्कि शोक का नजारा था।
बता दें कि महाराष्ट्र में स्कूलों में हिंदी भाषा लागू करने के सरकारी फैसले के खिलाफ बढ़ते विरोध को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने अपने आदेश वापस ले लिए। राज्य सरकार के इस फैसले के बाद शिवसेना (यूबीटी) और मनसे ने एक संयुक्त रैली का आयोजन कर इसे अपनी जीत करार दिया। इस रैली का एक और बड़ा कारण ये भी था कि 20 साल बाद ठाकरे बंधु एक मंच पर एक साथ दिखें।
राज ठाकरे पर भी सीएम का कटाक्ष
उद्धव के बाद सीएम फडणवीस ने मनसे प्रमुख राज ठाकरे पर धन्यवाद कहते है कटाक्ष किया। फडणवीस ने राज ठाकरे का धन्यवाद किया कि उन्होंने उन्हें दो ठाकरे चचेरे भाइयों को एकजुट करने का श्रेय दिया। राज ठाकरे ने मजाक में कहा कि उद्धव और राज को एक साथ लाना फडणवीस ने किया, जो बाल ठाकरे भी नहीं कर पाए थे।
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'उद्धव का भाषण में मराठी की बात नहीं'
फडणवीस ने कहा कि रैली में मराठी की बात नहीं हुई, बल्कि उद्धव का भाषण केवल अपनी सरकार गिरने और फिर से सत्ता में आने की योजना पर था। उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई में 25 साल तक शिवसेना ने रहते हुए विकास नहीं किया, जबकि मोदी के नेतृत्व में मुंबई का कायाकल्प हुआ है। उन्होंने कहा कि उन्होंने मराठी लोगों को उनके सही मकान दिलाए, जिससे उद्धव गुट जलन महसूस करता है। इसके साथ ही फडणवीस ने गर्व से कहा कि वे मराठी और हिंदू हैं और सभी मराठी और गैर-मराठी उनके साथ हैं।
कांग्रेस ने भी उद्धव को दी नसीहत
हालांकि इससे पहले कांग्रेस ने भी उद्धव और राज ठाकरे के इस रैली से खुद को किनारा कर लिया। साथ कांग्रेस ने ठाकरे बंधुओं को यह कहकर घेरा है कि यह लड़ाई सिर्फ उनकी नहीं थी, बल्कि पूरे राज्य के कई वर्गों ने इस फैसले का विरोध किया था।
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अब समझिए पूरा मामला
गौरतलब है कि महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने जून में आदेश जारी किया था कि पहली कक्षा से स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा। इस पर मराठी भाषा को कमजोर करने का आरोप लगते ही व्यापक विरोध हुआ। इसके चलते सरकार ने 29 जून को ये आदेश वापस ले लिए। हालांकि ठाकरे बंधु इसे जनता की जीत बता रहे हैं और भविष्य में मिलकर चुनाव लड़ने का संकेत दे रहे हैं, कांग्रेस ने यह साफ कर दिया है कि इस आंदोलन का श्रेय किसी एक पार्टी को नहीं दिया जा सकता।