असम और मेघालय के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए गुरुवार को एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। मीटिंग केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुई। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा और मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने अमित शाह के साथ अहम बातचीत की। बैठक को लेकर मेघालय के सीएम कोरनाड संगमा ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत के साथ अमित शाह से मुलाकात की और उन्हें क्षेत्रीय समितियों की रिपोर्ट से अवगत कराया। गृह मंत्री ने दोनों राज्यों द्वारा की गई पहल पर खुशी जताई। केंद्रीय गृह मंत्रालय इस रिपोर्ट की जांच करेगा और हम 26 जनवरी के बाद फिर से गृहमंत्री से मिलेंगे।
इससे पहले मेघालय के मुख्यमंत्री संगमा ने बुधवार को कहा था कि वे और असम के मुख्यमंत्री सरमा गुरुवार को केंद्रीय मंत्री अमित साह से मुलाकात करेंगे और दोनों राज्यों के बीच जारी सीमा विवाद को सुलझाने का प्रस्ताव रखेंगे। संगमा के इस एलान के बाद माना जा रहा था कि दोनों राज्य सीमा के छह इलाकों में सालों से चले आ रहे अपने विवाद को निपटाने पर सहमत हो गए हैं।
मेघालय सीएम ने यह एलान अपने प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद किया था। मेघालय सरकार ने विवाद सुलझाने के लिए तीन क्षेत्रीय कमेटियों का गठन किया था, जिसने हाल ही में अपनी रिपोर्ट सीएम संगमा को सौंपी।
गौरतलब है कि मेघालय की तरह ही असम ने भी विवादित सीमा के मुद्दे को सुलझाने के लिए एक कमेटी का गठन किया था, जिसने प्रस्ताव आगे रखे हैं। अब दोनों ही राज्यों की ओर से सामने आए इन प्रस्तावों को केंद्रीय गृह मंत्रालय के सामने रखा जाएगा, जो कि आगे इस पर विचार करेगा और विवाद को सुलझाने में अंतिम भूमिका निभाएगा।
संगमा ने कहा था कि भारतीय सर्वेक्षण विभाग को आना होगा और संयुक्त अवलोकन करना पड़ सकता है तथा विधेयक भी पारित करना होगा। उन्होंने कहा कि दोनों राज्य सीमावर्ती इलाकों में गांवों पर सहमत हो गए हैं तथा नदियों और वनों सहित प्राकृतिक सीमाओं की पहचान कर ली गई है। मतभेद वाले छह स्थानों पर 36 गांव है जिनका कुल क्षेत्रफल 36.79 वर्ग किमी है। संगमा ने कहा था कि सीमा विवाद 50 वर्षों से है और इसका हल करना मुश्किल कार्य है, लेकिन दोनों राज्यों की कोशिशों के चलते हम एक समाधान पर पहुंच गए हैं।
विपक्षी दलों ने फॉर्मूले का विरोध किया
इस बीच विपक्षी रायजर दल और असम जातीय परिषद ने मेघालय के साथ छह स्थानों पर सीमा विवाद के निपटारे के लिए असम सरकार के रुख का विरोध किया। रायजर दल अध्यक्ष अखिल गोगोई ने असम के लोगों के नाम एक खुले पत्र में सवाल किया कि क्या कोई राज्य सरकार अपनी वैध भूमि दूसरे राज्य के पक्ष में छोड़ सकती है। वहीं, असम जातीय परिषद के प्रमुख लुरिनज्योति गोगोई ने इस निर्णय को जनविरोधी कहा, क्योंकि इसमें जनमत की उपेक्षा की गई है।