दिल्ली को अपने जल की आपूर्ति के लिए हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन दिल्ली सरकार की योजना है कि राजधानी को अपनी जल की आवश्यकता के लिए आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
दिल्ली सरकार लगातार इसके लिए प्रयास कर रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री केजरीवाल ने आज भी उच्च अधिकारियों के साथ बैठक की और राजधानी में निकल रहे अपशिष्ट जल के शोधन के प्रयासों की समीक्षा की।
जानकारी के मुताबिक़ बैठक में तय किया गया है कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार से जो पानी फसलों की सिंचाई में इस्तेमाल के लिए इस्तेमाल किया जाता है, उस पानी को इन राज्य सरकारों से लेकर दिल्ली वालों को पीने के लिए इस्तेमाल कर लिया जाए।
इसके बदले में दिल्ली सरकार, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को अपने एसटीपी से उतना ही ट्रीटेड पानी दे जिससे इन राज्यों में सिंचाई की आवश्यकता को पूरी की जा सके। हालांकि अभी भी इसके लिए काफी प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस संबंध में दोनों सरकारों से बातचीत की जाए।
औचंदी नहर का पानी महत्त्वपूर्ण
हरियाणा सरकार औचंदी नहर में फसलों की सिंचाई के लिए 25 एमजीडी पानी छोड़ती है। हरियाणा सरकार इसी नहर के जरिए दिल्ली सरकार को पीने योग्य पानी भी देती है। चूंकि यह पानी भी साफ और पीने योग्य होता है, इसलिए हरियाणा सरकार से सिंचाई के लिए औचंदी नहर में छोड़े जाने वाले पानी को भी ले लिया जाए और उसका इस्तेमाल दिल्ली में पीने के लिए किया जाए।
इसी प्रकार दिल्ली सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार से अनुरोध किया है कि अगर यूपी सरकार सिंचाई में इस्तेमाल होने वाले 140 एमजीडी पानी को भी दिल्ली को पीने के लिए उपलब्ध करा दे, तो दिल्ली सरकार अपने एसटीपी से यूपी को 140 एमजीडी पानी वापस दे देगी। इससे दिल्ली की पानी की बड़ी कमी की पूर्ति हो सकती है।
दिल्ली में पानी की स्थिति
- विभिन्न एसटीपी से ट्रीटेड पानी- 520 एमजीडी
- हरियाणा से बादशाहपुर और डीडी-6 ड्रेन से मिलने वाला अनट्रीटेड पानी
- 105 एमजीडी उत्तर प्रदेश से गाजीपुर ड्रेन से मिलने वाला अनट्रीटेड पानी- 50 एमजीडी
- दिल्ली से डिस्चार्ज होने वाला अनट्रीटेड पानी- 142 एमजीडी
- सिंचाई और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाला पानी- 90 एमजीडी