पिछले कुछ महीनों में देश में जिस तेजी से जघन्य अपराधों की संख्या बढ़ी है उसी तेजी से इन अपराधों में लिप्त दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग भी बढ़ रही है। अब केंद्रीय मंत्री हों या मुख्यमंत्री सभी अपनी साख बचाने के लिए बलात्कारियों और नशे से जुड़े कारोबारियों को फांसी की सजा की मांग कर रहे हैं।
पिछले दिनों पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जेएंडके की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, एमपी के शिवराज सिंह चौहान सहित केंद्रीय मंत्री भी जघन्य अपराधों में शामिल लोगों को फांसी की सजा सुनाने की मांग कर रहे हैं। सभी केंद्रीय और मुख्यमंत्री ने केंद्र से मांग की है कि वह कानून में बदलाव करे और बलात्कार और जघन्य अपराधों से जुड़े लोगों को मौत की सजा का प्रावधान करे।
सोमवार को पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने केंद्र से ड्रग्स और नशे का व्यापार करने वालों के लिए मौत की सजा की मांग की है। उन्होंने केंद्र को अपनी मांग भेजी है। पंजाब मे पूरी एक पीढ़ी नशे के कारण बर्बाद हो चुकी है जिसकी वजह से अब जरूरी हो गया है कि नशे के कारोबारियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। अमरिंदर सिंह ने फांसी की सजा की मांग करते हुए कहा कि मैं पंजाब को नशा मुख्त राज्य बनाना चाहता हूं।
अमरिंदर सिंह की इस मांग पर पूर्व कानून सचिव ने भी सहमति जताई है। पूर्व कानून सचिव पी के मल्होत्रा का मानना है कि कुछ ऐसे अपराध है जिन्हें गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है जिसमें नशे का कारोबार ऐसी ही अपराध की श्रेणी में आता है। और नशे के बढ़ते व्यापार ने जिस तरह से पूरी पीढ़ी को बरबादकिया है उसकी रोकथाम के लिए कड़ी सजा दी जानी चाहिए और केंद्र को इस मामले में गंभीरता से सोचना चाहिए।
मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा को एक पत्र लिख कर गुजारिश की है कि बलात्कार जैसे मामले ने आम आदमी को हिला कर रख दिया है। ऐसे मामलों में गंभीर सजा दिए जाने की जरूरत है और तेजी से निप्टारे के लिए उच्च न्यायालयों को फास्ट ट्रैक की स्थापना कर मामलों की तेजी से सुनवाई करने की जरूरत है। उन्होंने सीजेआई से गुजारिश की है कि ऐसे मामलों को उच्च प्राथमिकता प्रदान किए जाने की जरूरत है।
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वैसे तो मध्य प्रदेश सरकार ने बलात्कारियों को फांसी पर चढ़ाने की मांग को लेकर नया अध्यादेश लाई है। इसके अनुसार 12 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ बलात्कार करने वालों को फांसी की सजा दिए जाने का प्रवधान रखा गया है। पिछले दिनों मध्यप्रदेश के मंदसौर में सात साल की बच्ची के साथ हुए जघन्य अपराध हुआ तो यह मांग और बढ़ गई है। बता दें कि बच्ची के साथ किया गया अपराध इतना जघन्य है कि जिसने बी सुना उसका खून खौल उठा।
बच्ची के गुप्तांग में जहां लोहे की रॉड डाली गई वहीं उसके गले को भी रेत दिया गया था। लड़की के शरीर पर, गला, चेहरा और गुप्तांगों पर गहरे घाव हैं। कई ऑपरेशन के बाद अब बच्ची की हालत में सुधार है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बच्ची के साथ दंरिंदगी करने वाले को फांसी पर झूलता हुआ देखना चाहते है। उन्होंने कहा कि मैं मंदसौर कांड के दोषियों को सिर्फ जेल की सलाखों के पीछे नहीं बल्कि फांसी पर झूलता देखना चाहता हूं। ऐसे लोग इस दुनिया में रहने लायक नहीं हैं।
बलात्कार की बढ़ती संख्या को देखते हुए सिर्फ मध्य प्रदेश सरकार ही नहीं बल्कि जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी बलात्कारियों के लिए फांसी की सजा की मांग कर चुके हैं। अप्रैल में जम्मू कश्मीर के कठुआ में 8 साल की बच्ची के साथ हुए बलात्कार के बाद सरकार ने बलात्कारियों के लिए फांसी की सजा को लेकर अध्यादेश पास किया था।
वहीं अप्रैल में उत्तर प्रदेश सरकार ने भी केंद्र से कानून में बदवाल की मांग की है। योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि अब समय आ चुका है कि बलात्कारियों को सिर्फ जेल नहीं बल्कि उससे कड़ी सजा दी जाए। और इन्हीं मांगों के साथ उन्होंने कानून में बदलाव की मांग के साथ केंद्र सरकार को पत्र लिखा है।
कानून में बदवाल की मांग के साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी खत लिखा है जिसमें फास्ट ट्रैक कोर्ट से मांग की है कि ऐसे जघन्य अपराधों के मामले छह महीने के भीतर ही निपटने चाहिए। यही नहीं डेथ पेनाल्टी की मांग को लेकर दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाती मालिवाल एक हफ्ते से अधिक समय तक भूख हड़ताल पर रहीं थीं। यही नहीं नाबालिग से बलात्कार मामले में केंद्रीय मंत्री मनेका गांधी ने भी नए अध्यादेश लाने और फांसी की सजा दिए जाने की मांग की है।