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COP-29: एजेंडे में कार्बन सीमा टैक्स शामिल करने पर विवाद, इस कारण पहले दिन जलवायु वार्ता में हुई देरी

Tue, 12 Nov 2024 01:21 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इस वर्ष के संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के मेजबान अजरबैजान के इस संदेश के साथ सम्मेलन की शुरुआत हुई, जिसमें सभी देशों से नए जलवायु वित्त लक्ष्य पर सहमत होने के लिए बकाया मुद्दों को तत्काल हल करने का आह्वान किया गया, जिसके बारे में संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टिल ने कहा कि यह हर देश के हित में है।
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कॉप-29 (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता के एजेंडे में यूरोपीय संघ के कार्बन सीमा कर जैसे एकतरफा व्यापार उपायों को शामिल किए जाने पर चीन, भारत तथा अन्य विकासशील देशों ने दुनिया के समृद्ध देशों का तीखा विरोध किया, जिससे सोमवार को कॉप-29 सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत में देरी हुई।

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संयुक्त राष्ट्र के जलवायु सम्मेलनों में एजेंडा विवाद आम है, लेकिन सोमवार को हुआ विवाद विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बार का केंद्रीय मुद्दा जलवायु परिवर्तन से निपटने और लड़ने में विकासशील देशों को वित्तीय मदद के नए लक्ष्य पर सहमति बनाना है। इसे हासिल करने के लिए देशों के पास समय बेहद सीमित है।

बकाया मुद्दों को हल करने का आह्वान
इस वर्ष के संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के मेजबान अजरबैजान के इस संदेश के साथ सम्मेलन की शुरुआत हुई, जिसमें सभी देशों से नए जलवायु वित्त लक्ष्य पर सहमत होने के लिए बकाया मुद्दों को तत्काल हल करने का आह्वान किया गया, जिसके बारे में संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टिल ने कहा कि यह हर देश के हित में है।
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इसके बाद कार्यवाही निलंबित कर दी गई ताकि प्रतिनिधि एजेंडे पर बातचीत कर सकें।

कार्बन सीमा टैक्स यूरोपीय संघ के टैक्स पर आधारित
विकसित और विकासशील देशों ने इस बात पर लंबी बहस की कि यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) जैसे एकतरफा व्यापार उपाय लागू किए जाएं या नहीं, जो सीओपी29 का एजेंडा आइटम है। इसके कारण उद्घाटन सत्र में काफी देरी हुई। यह कार्बन सीमा कर, खासकर भारत और चीन जैसे देशों से आयातित ऊर्जा-गहन उत्पादों (जैसे लोहा, इस्पात, सीमेंट, उर्वरक और एल्यूमीनियम) पर यूरोपीय संघ द्वारा लगाए जाने वाले कर पर आधारित है। 

विकासशील देशों ने कार्बन सीमा टैक्स को बताया हानिकारक
यूरोपीय संघ ने तर्क दिया कि यह कदम घरेलू स्तर पर बनाए गए सामान के लिए समान अवसर पैदा करेगा और आयातित सामान से उत्सर्जन को नियंत्रित करने में मदद करेगा। लेकिन अन्य देशों, खासकर विकासशील देशों ने इसे अपने लिए हानिकारक बताया। उनका कहना है कि ऐसे करों से उनकी अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान होगा और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार महंगा हो जाएगा। उन्होंने तर्क दिया कि संयुक्त राष्ट्र के जलवायु नियमों के तहत, किसी भी देश को उत्सर्जन में कमी की रणनीतियां दूसरों पर नहीं थोपनी चाहिए।

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