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जलवायु परिवर्तन: हिमालय के ऊपरी सिंधु बेसिन पर जबर्दस्त दबाव, विशेषज्ञों ने 100 अहम शोध प्रश्नों की पहचान की  

Wed, 27 Apr 2022 09:01 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कश्मीर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर शकील अहमद रोमशू ने कहा, अध्ययन में पहचाने गए शीर्ष 100 शोध प्रश्न यूआईबी में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विकासशील रणनीतियों और कार्य योजनाओं के लिए नीति निर्धारण में मदद करेंगे।
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जलवायु परिवर्तन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : pixabay
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विस्तार
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वैज्ञानिकों ने हिमालय क्षेत्र के ऊपरी सिंधु बेसिन (यूआईबी) की जैव विविधता को बनाए रखने और वहां रहने वाले समुदायों की रक्षा के लिए सौ महत्वपूर्ण शोध प्रश्नों की पहचान की है। ऊपरी सिंधु बेसिन पहाड़ी हिंदू-कुश काराकोरम हिमालय (एचकेएच) क्षेत्र में स्थित है, जिसका जम्मू कश्मीर और लद्दाख भी हिस्सा हैं।

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यह दुनिया के सबसे बड़े सिंचाई नेटवर्क को मदद करने वाली नदी प्रणालियों का आवास भी है। शोधकर्ताओं ने गौर किया कि पाकिस्तान, भारत, चीन और अफगानिस्तान इन जल संसाधनों पर निर्भर हैं, इसलिए इसका जलवायु परिवर्तन के अनुकूल होना आवश्यक है। शोधकर्ताओं में कश्मीर विश्वविद्यालय के भी शोधकर्ता है। विशेषज्ञों ने इस पर गौर किया कि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में नाटकीय बदलाव देखने को मिल सकता है। 

कश्मीर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर शकील अहमद रोमशू ने कहा, अध्ययन में पहचाने गए शीर्ष 100 शोध प्रश्न यूआईबी में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विकासशील रणनीतियों और कार्य योजनाओं के लिए नीति निर्धारण में मदद करेंगे। अध्ययन का नेतृत्व करने वाले ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे जलवायु वैज्ञानिक एंड्र्यू ओर ने कहा, यूआईबी में जल संसाधानों पर जबर्दस्त दबाव है, जिनमें जनसंख्या वृद्धि, औद्योगिकरण के साथ ही जलवायु परिवर्तन के कारण विभिन्न खतरे हैं।
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अध्ययन को शासन और नीति समेत व्यापक विषयों में बांटा गया 
शोधकर्ताओं ने कहा, अध्ययन का उद्देश्य सामाजिक और प्राकृतिक विज्ञान में अंतर और अवसरों की पहचान करना है ताकि जलवायु योजनाओं, जल प्रबंधन और विकास नीति में मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि इससे वर्तमान सोच की सीमाओं को चुनौती मिलती है। अध्ययन को शासन और नीति, सामाजिक आर्थिक प्रक्रियाओं और पृथ्वी प्रणाली प्रक्रियाओं के व्यापक विषयों में बांटा गया है। 

समाज विज्ञान के पहलुओं पर भी किया गया गौर  
प्रोफेसर रोमशू ने कहा, अध्ययन की प्राथमिकताओं में सामाजिक और प्राकृतिक विज्ञान के जिन महत्वपूर्ण पहलुओं की सूचनाओं का अभाव है, उसे पूरा करना है। साथ ही जलवायु परिवर्तन की वजह से पड़ने वाले प्रभावों को भी चिह्नित करना है, जिसकी पूर्व में अनदेखी हुई। प्रोफेसर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी इस्लामिक विश्वविद्यालय, अंवतिपुरा के भी कुलपति हैं।

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