इस साल जुलाई का महीना सबसे गर्म साबित हो सकता है, क्योंकि तापमान में असामान्य ढंग से वृद्धि हुई है। मेन यूनिवर्सिटी के क्लाइमेट चेंज इंस्टीट्यूट द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई के पहले 20 दिनों में तापमान 1979 से 2021 के औसत तापमान से ज्यादा दर्ज किया गया।
नेशनल सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक साइंस और रीडिंग विवि के मौसम विज्ञान विभाग से जुड़े वैज्ञानिक कहते हैं कि जुलाई जून के नक्शेकदम पर है। जलवायु परिवर्तन पर बनाए अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) ने 2021 में जारी जलवायु मूल्यांकन रिपोर्ट में यह बताया है कि वैश्विक तापमान एक लाख से अधिक वर्षों में अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच रहा है। जर्नल नेचर में 2021 में प्रकाशित एक अध्ययन का निष्कर्ष है कि पिछले 24,000 वर्षों की तुलना में आधुनिक समय में जो तापमान में वृद्धि हुई है उसकी दर व परिमाण असामान्य है।
लू की चपेट में पूरा उत्तरी गोलार्ध
देखा जाए तो उत्तरी अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, दक्षिणी यूरोप और चीन एक साथ लू की चपेट में हैं। वहीं, यूरोप में ग्रीस, पूर्वी स्पेन, सार्डिनिया, सिसिली और दक्षिणी इटली के कुछ हिस्सों में पिछले सप्ताह तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। अमेरिका के नेशनल वेदर सर्विस क्लाइमेट प्रिडिक्शन सेंटर का कहना है कि मध्य-पश्चिमी अमेरिका के कई स्थान साल के अपने सबसे गर्म तापमान तक पहुंच सकते हैं।
ग्लोबल बॉयलिंग का दौर : गुटेरस
संंयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरस ने कहा कि दुनिया ग्लोबल वार्मिंग के दौर से काफी आगे आ चुकी है। उन्होंने कहा, अब ग्लोबल बॉयलिंग (खौलने) का दौर शुरू हो चुका है। गुटरेस जुलाई को सबसे गर्म महीना घोषित करने पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।
जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुकदमों की संख्या पांच सालों में दोगुने से अधिक बढ़ी
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, घटते जल संसाधनों से लेकर खतरनाक हीटवेव तक जलवायु परिवर्तन सीधे तौर पर लाखों लोगों को प्रभावित करने लगा है। यही वजह है कि इससे जुड़े अदालती मामलों की संख्या पांच वर्षों में दोगुनी से अधिक हो गई है।
यूएईपी ने यह रिपोर्ट न्यूयॉर्क स्थित कोलंबिया यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर तैयार की है, जो जलवायु परिवर्तन से जुड़े मामलों को ट्रैक करके वैश्विक डेटाबेस तैयार करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच सालों में 65 न्यायालयों में इस मुद्दे से जुड़े करीब 2,180 मुकदमे दायर किए गए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2017 तक, 24 न्यायालयों में केवल 884 मामले दर्ज किए गए थे।