येल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा असर अब पक्षियों, सरीसृपों और स्तनधारी प्रजातियों पर पड़ रहा है। प्रकृति में मौजूद कई जीव अपनी पारंपरिक जीवनशैली को बनाए नहीं रख पा रहे हैं और उनका अस्तित्व संकट में है।
धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा है और इसका असर जीव-जंतुओं की कई प्रजातियों पर भी दिखाई देने लगा है। येल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा असर अब पक्षियों, सरीसृपों और स्तनधारी प्रजातियों पर पड़ रहा है। प्रकृति में मौजूद कई जीव अपनी पारंपरिक जीवनशैली को बनाए नहीं रख पा रहे हैं और उनका अस्तित्व संकट में है। इसके नतीजे नेचर इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन नामक पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।
शोधकर्ताओं के अनुसार अब तक माना जाता था कि पक्षी जलवायु परिवर्तन का आसानी से सामना कर सकते हैं क्योंकि वे उड़ान भरकर अपनी जगह बदल सकते हैं। लेकिन यह शोध इस धारणा को खारिज करता है। पक्षी इतनी उड़ान नहीं भर सकते कि वे जलवायु परिवर्तन से बच सकें। अध्ययन में 406 पक्षी प्रजातियों का 20 वर्षों का डेटा विश्लेषण किया गया। इसके अनुसार गर्मियों में पक्षी औसतन 40 से 50 मील उत्तर की ओर प्रवास करते हैं, जिससे वे लगभग 1.28 डिग्री सेल्सियस अतिरिक्त गर्मी से बच पाते हैं।
उड़ नहीं सकते तो सरीसृप और स्तनधारी कहां जाएं
अगर पक्षियों की हालत ऐसी है, तो उन जीवों की क्या स्थिति होगी जो उड़ तक नहीं सकते। शोध में कहा गया है कि सरीसृप और स्तनधारी जैसे जीव जिनकी गति और प्रवास की क्षमता सीमित होती है,जलवायु परिवर्तन का सबसे बुरा असर झेल रहे हैं। वे अपने पारंपरिक आवासों में ही फंसे हुए हैं, जहां तापमान तेजी से बढ़ रहा है। न तो उनके पास उड़ने का विकल्प है और न ही वे लंबी दूरी तय कर सकते हैं। इस कारण वे सबसे ज्यादा खतरे में हैं।