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चिंताजनक: जलवायु परिवर्तन संग बढ़ती आबादी, घटता जल गंभीर खतरा, भारत के पास दुनिया का सिर्फ चार फीसदी पानी

Tue, 30 May 2023 05:43 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल देश में प्रति व्यक्ति 1486 घन मीटर जल उपलब्ध है, जो 2031 तक घटकर 1,367 घन मीटर रह जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में लोगों को जल की कमी की वजह से गंभीर सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
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जल संकट (फाइल फोटो) - फोटो : संवाद
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विस्तार
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जलवायु परिवर्तन के साथ ही बढ़ती आबादी और तेजी से घटते जल संसाधन देश के सामने गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। 142 करोड़ की आबादी के साथ भारत दुनिया की कुल जनसंख्या में 28 फीसदी का हिस्सेदार है, जबकि इसके हिस्से में दुनिया के सिर्फ चार फीसदी जल संसाधन ही आते हैं। इसके ऊपर से जलवायु परिवर्तन व बारिश के बदले हुए चलन से भी मुश्किल बढ़ रही है क्योंकि, लंबे समय तक लगातार रिमझिम बारिश से जो भूगर्भीय जल बढ़ता था, वह सिलसिला अब कम हो रहा है। इसकी जगह अचानक तेजी से बारिश आती है और ज्यादातर वर्षा जल बह जाता है। जल संसाधनों के लिहाज से भारत दुनिया के सबसे संकटग्रस्त इलाकों में शामिल है।

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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल देश में प्रति व्यक्ति 1486 घन मीटर जल उपलब्ध है, जो 2031 तक घटकर 1,367 घन मीटर रह जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में लोगों को जल की कमी की वजह से गंभीर सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसके समाधान के लिए बेहतर जल प्रबंधन, नीतिगत सुधारों और प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र की सुरक्षा की तत्काल जरूरत है।

पानी की कमी अकेली चुनौती नहीं
संयुक्त राष्ट्र के इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) की लेखिका अदिति मुखर्जी कहती हैं, खराब जल प्रबंधन और नीतिगत प्रोत्साहन की कमी के चलते भारत लंबे समय से जल संसाधनों की कमी से त्रस्त है। जलवायु परिवर्तन व बारिश में उतार-चढ़ाव जैसी घटनाओं ने इस समस्याओं को और बढ़ा दिया है। अदिति का कहना है कि समुद्र के स्तर में वृद्धि और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के तेज होने की वजह से तटीय क्षेत्रों में भूजल पर खारे पानी का अतिक्रमण भी बड़ी समस्या है।
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संवहनीय जल प्रबंधन उपायों की जरूरत
भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी के विशेषज्ञ व अनुसंधान निदेशक अंजल प्रकाश कहते हैं, जलवायु परिवर्तन और जनसंख्या वृद्धि दोनों ही वजहों से भारत में जल संसाधनों से जुड़ी चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे में मौजूदा संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और संवहनीय प्रबंधन की जरूरत है। इसके लिए जहां, तटीय क्षेत्रों में मैंग्रोव को बढ़ावा देना होगा।

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